रेशमा शहर में किराए पर कमरा लेकर रहने वाली आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को चंगुल में फंसाती थी। अच्छे कपड़े और बड़े होटलों में पार्टी देकर उनको बहकाती थी। धीरे-धीरे चंगुल में फंसाकर उन्हें गलत काम के लिए मजबूर करती थी।
गोरखपुर की रेशमा खान उर्फ मनीषा हाई-फाई जिंदगी का ख्वाब दिखाकर भोली-भाली लड़कियों को अपने जाल में फंसाती थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय रहकर रेशमा लड़कियों से पहले दोस्ती करती थी। इसके बाद उन्हें मॉडलिंग और अन्य कामों में लगवाने का लालच देकर रुपये कमाने का ऑफर देती थी।
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उन्हें शान की जिंदगी दिखाने हुक्का बार ले जाती थी। इसके बाद उन्हें जिस्मफरोशी के धंधे में धकेल देती थी। ये तथ्य पुलिस की जांच में सामने आए हैं। पुलिस के अनुसार, कक्षा छह पास रेशमा खान फर्राटेदार इंग्लिश भी बोलती है।
वह देह व्यापार कराने वाले गिरोह के सरगना अनिरुद्ध ओझा के संपर्क में तीन साल पहले आई। अनिरुद्ध ने 13 मार्च को शाहपुर इलाके में जेनिस बॉटल रेस्टोरेंट खोला। इसके बाद रेस्टोरेंट की आड़ में ही यहां पर हुक्का बार भी संचालित किया जाने लगा। इसमें अधिकतर किशोरियों को रेशमा ही फंसाकर लाती थी।
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शहर के अलावा भी रेशमा के संपर्क में महराजगंज, देवरिया और कुशीनगर की लड़कियां भी थीं। इसकी जांच चल रही है। रेशमा के मोबाइल में 50 से अधिक लड़कियों के फोटो मिले हैं। इसे कई लोगों के व्हाट्सएप पर भेजा गया है। पुलिस अब उनसे भी पूछताछ करेगी।
निशाने पर थीं आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियां
रेशमा शहर में किराए पर कमरा लेकर रहने वाली आर्थिक रूप से कमजोर लड़कियों को चंगुल में फंसाती थी। अच्छे कपड़े और बड़े होटलों में पार्टी देकर उनको बहकाती थी। धीरे-धीरे चंगुल में फंसाकर उन्हें गलत काम के लिए मजबूर करती थी। जो एक बार इस जाल में फंस जाता था, उसको फिर डरा-धमकाकर देह व्यापार का धंधा करने के लिए मजबूर करती थी।
पुलिस के अनुसार, रेशमा खान हुक्का पीने की शौकीन है। वह खुद भी हुक्का बार में धुआं उड़ाती थी। अन्य लड़कियों को धुएं का छल्ला बनाना सिखाती थी। जब भी कोई नई लड़की हुक्का बार में आती थी, वह रेशमा की फैन हो जाती थी।
रेशमा ने बताई अपनी कहानी
पूछताछ के दौरान रेशमा खान ने बताया कि पिता की तबीयत अक्सर खराब रहती थी। उनके बेड होने पर से घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। दवा और घर खर्च चलाने के लिए अनिरुद्ध ओझा से नौकरी मांगी थी। उसने नौकरी दी थी। वहां उसके साथ भी गलत काम हुआ, लेकिन मजबूरी की वजह से कहीं शिकायत नहीं कर पाई।
वे लोग जो कहते गए, वैसा करती गई। इसमें रुपये भी कमाए। इसी बीच पिता की मौत हो गई। इस दौरान काफी रुपये खर्च हो गए। इधर, एक माह से वह भागती फिर रही थी। केस के सिलसिले में भी कमाए गए सारे रुपये डूब गए। घर पर मां और भाई रहते हैं। उसकी वजह से वे लोग भी भागते फिर रहे हैं।