गोरखपुर बिजली विभाग पहुंचे एक उपभोक्ता के पैरों तले उस वक्त जमीन खिसक गई, जब अधिकारी ने मीटर रीडिंग देखकर उन्हें बताया कि उनका बिल तो 70 लाख रुपए होना चाहिए। जबकि, कनेक्शन धारक नौ हजार रुपये का बिल मिलने पर ही ज्यादा बिल की शिकायत लेकर वहां गई थी। हालांकि, यह बताने के साथ अधिकारी का सिर भी चकरा गया कि दो किलोवाट के एक घरेलू उपभोक्ता के मीटर की रीडिंग नौ लाख यूनिट कैसे हो सकती है ? खैर, अधिकारी ने ध्यान से देखा तो उन्हें समस्या समझ में आ गई कि दो किलोवाट के कनेक्शन पर अधिकतम छह हजार यूनिट का बिल बन सकता है, मीटर रीडर ने लापरवाही से नौ लाख यूनिट का बिल बना डाला।
फिलहाल, गोलघर के एसडीओ ऐश्वर्य सिंह ने बिल सही करवाने का निर्देश दिया है। साथ ही बिलिंग कर्मचारियों की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए आला अधिकारियों को पत्र लिखने की बात कही है। जानकारी के अनुसार तारामंडल की शीला सिंह के नाम दो किलोवाट का घरेलू कनेक्शन है। सितंबर 2021 तक उन्होंने बिजली बिल जमा किया है। अक्तूबर माह में न मीटर रीडर आया न बिल मिला। लिहाजा, जमा भी नहीं किया गया। मीटर रीडर ने नवंबर महीने में घर आकर बिल बनाया और नौ हजार रुपये से अधिक का बिल दे दिया।
अचानक नौ हजार रुपये से ज्यादा का बिजली बिल आने पर वह शिकायत करने शुक्रवार को गोलघर खंड कार्यालय पहुंचीं। पड़ताल में पता चला कि सीलिंग का बिल बनाया गया, जिस कारण गड़बड़ी हुई है। बिल देखकर उपखंड कार्यालय के कर्मचारी भी आश्चर्य में पड़ गए। उपभोक्ता का 9 लाख 98 हजार 677 यूनिट रीडिंग का बिल बना दिया गया था। इस रीडिंग के हिसाब से बिल बनता तो 70 लाख रुपये का होता।