साहब, 20 लाख देने को तैयार था फिर भी बेटे को मार डाला
गोरखपुर। रविवार रात 9 बजे थे। आखिरी बार अपहरणकर्ताओं का फोन आया और पिता महाजन ने बीस लाख रुपये देने की हामी भी भर दी। मगर, तब तक अपहरण करने वालों को संदेह हो गया था कि वे पकड़े जाएंगे और शायद इसी वजह से उन्होंने बलराम को निर्ममता से मार डाला। बेटे को गंवा चुके पिता की अब एक ही मांग है कि अपहर्ताओं को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि फिर किसी के साथ इस तरह की वारदात न हो।
गोपनीयता बरतने में नाकाम रही पुलिस
अपहरण के खुलासे के मामले मेें सर्वाधिक महत्वपूर्ण तत्व है गोपनीयता। अपहरण हुआ, अपहरणकर्ताओं ने परिवार से संपर्क साधा। फिरौती मांगी। ये सारे तथ्य पूरी तरह से गोपनीय रहने पर ही अपह्त की जीवन रक्षा और अपहरणकर्ताओं तक पहुंचना संभव हो पाता है। इस मामले में पुलिस पूरी तरह से विफल दिखी। आलम यह था कि रविवार की रात तक घटना सोशल मीडिया पर पूरी तरह से वायरल हो चुकी थी। देर रात पुलिस को होश आया कि अगर ये खबर अखबारों में विस्तार से छप गई तो किशोर की जान को खतरा हो सकता है। रात करीब एक बजे एसपी नार्थ अरविंद पांडेय ने शहर के प्रमुख अखबारों से संपर्क साधना शुरू किया। यह वह वक्त था, जब ज्यादातर अखबारों के संस्करण छूट चुके थे। जिन अखबारों के संस्करण नहीं छूटे थे, या प्रिंटिंग चल रही थी, उन्होंने एक बच्चे की जान की खातिर मशीन रोककर जो भी संभव था किया, मगर समय से चेतने से जो फायदा हो सकता था, उसे पुलिस ने गंवा दिया।
छह भाई बहनों में पांचवें नंबर पर था बलराम, अब किसे बांधेंगी राखी
बलराम पांच बहनों बिंटू, रेनू, गोली, सत्या और खुशी का इकलौता भाई था। वह महाजन की पांचवीं नंबर की संतान था। वह पांचवीं कक्षा में पढ़ रहा था और घर के करीब ही पढ़ने जाता था। घरवालों के मुताबिक वह पढ़ने में काफी होनहार था। बहनों का रो-रोकर हाल बेहाल है। उनका कहना है कि तीन अगस्त को रक्षा बंधन है। अब भाई को कभी रक्षा बंधन नहीं बांध पाएंगी। जिन बदमाशों ने भाई की जान ली है, उसे भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
सात किलोमीटर दूर मिला शव
बलराम का शव घर से करीब सात किलोमीटर दूर बोरे में मिला। आशंका है कि रविवार देर शाम ही उसकी हत्या की गई और फिर बोरे में भरकर अंधेरे में शव को लेकर जाकर फेंक दिया गया।