अमर उजाला बेस संवाद : ‘चुनौतियों को अवसर में बदला, पटरी पर आने लगी जिंदगी’
गोरखपुर। कोरोना संक्रमण का प्रभाव हर क्षेत्र पर पड़ा है, लेकिन चुनौतियों को अवसर में तब्दील करने का हुनर भी लोगों ने सीख लिया है। एजूकेशन, बैकिंग, उद्योग, खेल, व्यापार, चिकित्सा सहित कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है, जहां आगे बढ़ने के विकल्प न हों। इसमें तकनीक का अहम रोल हैैै। शहर के उद्योगपति, चार्टर्ड एकाउंटेंट , व्यापारी, बैंक प्रबंधक, विद्यार्थी, खिलाड़ी व शिक्षाविदों ने अमर उजाला बेस संवाद के तहत आयोजित वेबिनार में वेबाक राय रखी। ‘कोविड 19 से सीख’ विषयक वेबिनार में अपने-अपने क्षेत्र के दिग्गजों नेे कहा कि महामारी के बीच ही जिंदगी, कारोबार को गति देना है। सब कुछ तेजी से ठीक हो रहा है। कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए कारोबार को आगे बढ़ाया जा रहा है। ऑनलाइन एजूकेशन को छोटे-बड़े सबने आत्मसात कर लिया है।
लागत कम करें, मार्केट को देखें तो मुश्किलें खत्म होंगी
इस वक्त सबसे अहम कोरोना महामारी के खतरों से बचना है। फैक्ट्रियों में दूरी बनाकर काम कराने की जरूरत है। यह दौर थोड़ा मुश्किल है, लेकिन प्लानिंग करके चलें तो चुनौतियों को अवसर में बदल सकते हैं। हमें यह ध्यान में रखना होगा कि उद्योग का पहिया चलता रहे। हमनें लागत कम करने के तरीके अपनाएं हैं। अब बहुत ज्यादा दिक्कत नहीं आएंगी। ऐसा ही और उद्योगपति कर सकते हैं। हमें मार्केट पर फोकस करना चाहिए। जो माल हम तैयार कर रहे हैं, वह बिक पाएगा या नहीं, इसकी प्लानिंग पहले से करनी चाहिए। ये सब बिंदु हैं, जिन पर ध्यान देकर इस महामारी के बीच भी खुद को आगे बढ़ाया जा सकता है। - मयंक अग्रवाल, निदेशक गैलेंट इस्पात लिमिटेड
सोना, चांदी में लांग टर्म निवेश फायदेमंद
कोविड-19 ने अचानक दस्तक दी। इससे निपटने का किसी के पास कोई ब्लूप्रिंट नहीं है। कोई तैयारी भी नहीं हुई थी। लेकिन जब चुनौतियां आती हैं तो विकल्प भी निकलते हैं। जब शोरूम खुला तो हमने पहली प्राथमिकता स्टॉफ और ग्राहक की सुरक्षा को दी। रोजाना दुकान को सैनिटाइज कराते हैं। ग्राहकों को भी सोशल डिस्टेंसिंग बरकरार रखने के लिए कहा जाता है। मॉस्क और ग्लब्स को मुहैया कराया जाता है। इसकी मानीटरिंग नियमित होती है। कोरोना संक्रमण के बीच ग्राहकों के लिए सोना और चांदी में निवेश करना लाभकर होगा। सोने में लंबी अवधि का निवेश फायदेमंद होगा। आने वाले समय में सोने की कीमतें और बढ़ेंगी। - वैभव सराफ, डायरेक्टर ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स
ऑनलाइन क्लास के रूप में मिला विकल्प
कोरोना के दौर में ऑनलाइन क्लास के रूप में नया विकल्प मिला है। स्कूल बंद होने पर ई-क्लास को शुरू करना बड़ी चुनौती थी। इससे लोग अनभिज्ञ थे, लेकिन इस चुनौतीपूर्ण कार्य को भी सफलतापूर्वक किया गया। बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं हुई। ई-कंटेंट तैयार करने में मेहनत तो ज्यादा लगी लेकिन बच्चे इसे बेहतर समझ ले रहे हैं। अभिभावक और विद्यार्थी सभी खुश हैं कि आपदा के समय में भी पढ़ाई चल रही है। कक्षा एक से बारह तक के विद्यार्थियों के ऑनलाइन एग्जाम भी कराए जा रहे हैं। - डॉ शिखा सिंह, शिक्षाविद आरपीएम एकेडमी गोरखपुर
नियमों को और आसान करने की जरूरत
इस समय लोगों से मिलना-जुलना बंद हो गया, लेकिन तकनीक ने काम को आसान किया है। सरकार ने भी नियमों को सरल किया है। आयकर और जीएसटी के मद्देनजर अभी नियमों को और ज्यादा आसान करने की जरूरत है। इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से मजबूत हो और आगे बढ़े, इस संबंध में नई तकनीक विकसित की जानी चाहिए। इस कठिन दौर में मीडिया की भूमिका सराहनीय रही है। समय-समय पर ऐसी जानकारी मिलती रही है, जिससे कामकाज को आगे बढ़ाने में दिक्कत नहीं आई। - शिशिर दुबे, चार्टर्ड अकाउंटेंट
ऑनलाइन बैकिंग की तरफ बढ़े कदम
कोरोना की चुनौतियों को देखकर बैंकिंग प्रणाली को बदला गया है। इंटरनेट बैकिंग पर जोर दिया जा रहा है। वैसे, कई एप भी लांच हुए हैं जिनसे ग्राहकों को आसानी होगी। खाता खुलवाने के लिए अब बैंक जाने की जरूरत नहीं है। आप चाहेंगे तो बैंक घर पर आकर खाता खोलेगा। एम पासबुक, पीएनबी वन आदि कई ऑनलाइन प्रक्रिया शुरू हुई है। कोविड-19 के समय कई इंश्योरेंस कंपनियों से टाइअप कर हेल्थ पॉलिसी शुरू हुई है। पीएनबी के ग्राहकों को प्रीमियम में छूट मिलेगी। - हिमांशु भारती, सीनियर मैनेजर रामगढ़ताल ब्रांच पीएनबी
टेली मेडिसिन है बेहतर विकल्प
कोरोना संक्रमण के दौरान टेली मेडिसिन एक बेहतर विकल्प है। इससे मौजूदा समय की मुश्किलों को दूर कर सकते हैं। मरीजों के आने से सबसे ज्यादा खतरा कोराना संक्रमण के फैलने का है। टेली मेडिसिन को लेकर प्लानिंग की जरूरत है। इससे डॉक्टर और मरीज दोनों सुरक्षित रहेंगे। जहां तक चुनौतियों की बात है तो सोशल डिस्टेंसिंग, सैनिटाइजेशन आदि जितने कारगर तरीके हैं उसे अपनाया जा रहा है। प्राइवेट अस्पतालों को साथ लेकर कोरोना की लड़ाई और मजबूती से लड़ी जा सकती है। डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ अपना 100 फीसदी योगदान दे रहे हैं। - डॉ. गौरव पांडेय (एमबीबी, एमडी मेडिसिन), पूर्वांचल- मेट्रो सिटी हॉस्पिटल
इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीक की कमी थी, पर चुनौती स्वीकारी
बड़े-बड़े तकनीकी संस्थानों में ऑनलाइन क्लास चलाई जाती है। वहां इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीक की जानकारी बच्चों के साथ शिक्षकों को भी होती है। मगर, सरकारी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में इनका संचालन बेहद मुश्किल था। शिक्षक तो तकनीक से अपग्रेड हैं, मगर यहां पढ़ने वाले बच्चे छोटे हैं। उन्हें तकनीक की ज्यादा जानकारी नहीं और स्मार्टफोन का भी अभाव है। हमने इसे चुनौती के रूप में स्वीकार किया। व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर जिनके पास स्मार्टफोन थे, उन्हें अध्ययन सामग्री और गृहकार्य दिया गया। जिनके पास साधारण फोन थे, उन्हें फोन कॉल करके जानकारी दी जा रही है। - हर्ष श्रीवास्तव, शिक्षक प्राथमिक विद्यालय साहुलाखोर खजनी
ऑनलाइन क्लास ने बचाया, मगर अभी सुधार की गुंजाइश
कोरोना संकट में विद्यार्थियों का सिलेबस पिछड़ने से बचाने के लिए ऑनलाइन क्लास का विकल्प बना, लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत नेटवर्क की है। खासकर ग्रामीण इलाकों से आने वाले विद्यार्थी तो क्लास से जुड़ ही नहीं पाते हैं। एमबीए अंतिम वर्ष में विद्यार्थियों को कुछ स्पेशलाइजेशन चुनना होता है, जो उनके लिए आगे फायदेमंद होता है। रेगुलर क्लास में शिक्षक, सहपाठियों से भी मदद ली जा सकती है। मगर ये सभी चीजें बंद हो गई हैं। कठिन चुनौती सामने है। बचकर ही शिक्षा पूरी करनी है। - श्रेया भरतिया, एमबीए फाइनल ईयर आईटीएम गीडा
महामारी के दौर में परीक्षाएं सकुशल कराने का खाका तैयार
कोरोना संकट ने उच्च शिक्षण संस्थानों के सामने भी चुनौतियां पेश कीं पर ई-कंटेंट ने बहुत हद तक मुश्किलें आसान कर दी हैं। सोशल डिस्टेंसिंग की वजह से प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों को अगली कक्षाओं में प्रमोट करने के फैसला लिया गया है। चतुर्थ वर्ष के विद्यार्थियों की ऑनलाइन परीक्षा कराने की बात हो रही है। उसी अनुरूप पेपर तैयार किए गए हैं। हालांकि प्रैक्टिकल करा पाना संभव नहीं है, क्योंकि इसके लिए विद्यार्थियों को लैब में बुलाना होगा। वैसे, ऑनलाइन क्लास इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों के लिए नया नहीं है। आईआईटी समेत देश के टॉप इंस्टीट्यूट के एक्सपर्ट के वीडियो और लेक्चर्स ऑनलाइन ही हैं। - डॉ. कृष्ण भूषण सहाय, असिस्टेंट प्रोफेसर, मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी)
देश में बनी चीजों के इस्तेमाल को दें तवज्जो
क्लास में फेस टू फेस पढ़ाई से ज्यादा समझ में आता है। संकट की इस घडी में ऑनलाइन पढ़ाई का बेहतर विकल्प मिला है। विद्यार्थी भी जिम्मेदार है। देश की जीडीपी कोरोना संकट के पहले अच्छी थी। अब लुढ़ककर नीचे आ गई। इसमें हर व्यक्ति को योगदान देने की जरूरत है। जरूरी है कि हम भारत में बनी वस्तुओं का इस्तेमाल करें। निश्चित रूप से विदेेशी ब्रांड भारतीय उत्पादों से देखने में बेहद आकर्षक हैं, मगर भारतीय उत्पाद भी कमतर नहीं हैं। एक बार भरोसा करके देखने की जरूरत है। पूरी दुनिया में सब कुछ बदल रहा है। इसी तरह का बदलाव हर भारतीय को अपने अंदर लाना है। - रैना श्रीवास्तव, बीटेक फाइनल ईयर आईटीएम गीडा
ऑनलाइन फिजिकल फिटनेस का टिप्स
महामारी के समय में फिजिकल फिटनेस और प्रैक्टिस पूरी तरह से प्रभावित हुई है। खेल प्रतियोगिताएं बंद हैं। ऐसे में खुद को फिजिकली फिट रखना सबसे बड़ी चुुुनौती है। फिटनेस बनी रहेगी तो जब भी स्थितियां सामान्य होंगी, हम फिर मैदान पर उतरकर शहर और देश का नाम रोशन करेंगे। कठिन चुनौती के बीच रास्ता निकाला है। शारीरिक व्यायाम के वीडियो तैयार किए, जिसे सीनियर खिलाड़ियों के साथ शेयर भी करते हैं। फोन या वीडियो के माध्यम से उनसे सलाह ली जाती है। जैसे मैदान में प्रैक्टिस करते थे, वैसे ही घर पर कर रहे हैं। इसी का नतीजा है कि पहले की तरह फिट हैं। ऐसा सभी खिलाड़ी कर रहे हैं। - दीक्षा पांडेय, कराटे और बॉक्सिंग खिलाड़ी, गोरखपुर विश्वविद्यालय