एम्स दिल्ली की तर्ज पर 750 रुपये निर्धारित किया गया प्रति शिफ्ट का शुल्क
पूर्वांचल के मरीजों को दूसरे शहरों के नहीं लगाने होंगे चक्कर
गोरखपुर। कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे मरीजों को रेडियोथेरेपी (सिकाई) के लिए न तो दूसरे शहरों की दौड़ लगानी पड़ेगी, न ही निजी अस्पतालों का भारी-भरकम खर्च उठाना होगा। एम्स में अत्याधुनिक तकनीकों से लैस कैंसर रोग विभाग में न्यूनतम शुल्क पर रेडियोथेरेपी की सुविधा मिलेगी। इलाज की दर महज 750 रुपये प्रति शिफ्ट रखी गई है। यह प्रदेश में रेडियोथेरेपी का सबसे कम शुल्क है।
एम्स प्रशासन के मुताबिक, मई से रेडियोथेरेपी की सुविधा ट्रायल बेसिस पर दी जा रही थी, यह एम्स में सर्जरी करवा चुके मरीजों के लिए उपलब्ध थी और पूरी तरह से निशुल्क थी। ट्रायल के बाद इसे सभी कैंसर मरीजों के लिए खोला गया है और दिल्ली एम्स की दरों के अनुरूप 750 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। इलाज की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए दो कंसलटेंट डॉक्टर, दो सीनियर रेजिडेंट, दो पीजी छात्र, दो तकनीशियन और एक रेडियोथेरेपी ऑफिसर की टीम प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक कार्य कर रही है।
कैंसर रोग विभाग में करीब 18 करोड़ रुपये की लागत से हाई एनर्जी लीनियर एक्सेलेरेटर, ब्रेकीथेरेपी मशीन और सीटी सिमुलेटर जैसी आधुनिक मशीनों की स्थापना की गई है।
वर्जन
पूर्वांचल के लोगों को कैंसर के इलाज के लिए दूसरे बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ता था। एम्स में अत्याधुनिक मशीनों के साथ यह सुविधा शुरू होने से अब उन्हें घर के पास ही बेहतर और सस्ता इलाज मिल सकेगा। इसलिए इसका शुल्क कम से कम करने की कोशिश की गई है। हमारा उद्देश्य है कि गुणवत्तापूर्ण इलाज हर मरीज तक पहुंचे, भले वह किसी भी आर्थिक पृष्ठभूमि से आता हो।
-डॉ. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक