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बनाइए मुरब्बा और अचार महीने में कमाइए हजारों हजार

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सच्चिदानंद पांडेय - फोटो : AMAR UJALA
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अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। लॉकडाउन खत्म होने के बाद रोजगार के संकट की स्थिति में मुरब्बा अचार का उत्पादन आपके लिए स्वरोजगार का बहुत बेहतर जरिया हो सकता है। इसका प्रशिक्षण ना सिर्फ काफी आसान है बल्कि गोरखपुर में भी इसकी प्रशिक्षण की व्यवस्था है। खाद्य प्रसंस्करण से संबंधित मात्र एक का प्रशिक्षण प्राप्त करके आप इस रोजगार को शुरू कर सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि इस प्रशिक्षण के बाद स्वरोजगार के लिए सरकार की ओर से वित्तीय सहायता भी दी जाती है। यह सहायता एक लाख रूपये तक हो सकती है। इस प्रशिक्षण को पाकर अगर आप खाद्य प्रसंस्करण के अंतर्गत अचार और मुरब्बा बनाना शुरु कर देते हैं तो संभव है कि आप महीने में 15 से 20 हजार रुपया आसानी से कमा सकें। आने वाला समय निश्चित तौर पर काफी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। लॉक डाउन की वजह से आर्थिक रूप से कमजोर हो चुके उद्योगों में रोजगार के अवसर कम होंगे। इस बात की भी पूरी आशंका है कि कई लोगों के हाथों से रोजगार भी छिन जाएगा। ऐसे में जीवन यापन के लिए स्वरोजगार एक बेहतर विकल्प होगा। केंद्र और प्रदेश सरकार की ओर से भी स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रकार की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इन्हीं योजनाओं में से एक है महात्मा गांधी खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना। इस योजना को राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र गोरखपुर की ओर से के मंडल के सभी जिलों के न्याय पंचायतों में संचालित किया जाता है। ::: एक लाख रूपये तक मिलती है सब्सिडी महात्मा गांधी खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के तहत एक महीने का खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यमिता प्रशिक्षण का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। यह पूर्णता निशुल्क होता है। इस प्रशिक्षण को प्राप्त करने के बाद अगर कोई भी व्यक्ति अपना उद्योग लगाना चाहता है तो सरकार की ओर से 50% तक की सब्सिडी दी जाती है। यह राशि अधिकतम एक लाख रुपए तक होती है। इस प्रशिक्षण के अंतर्गत अचार बनाना, मुरब्बा बनाना, आटा पीसना, मसाला तैयार करना, पनीर बनाना, सब्जियों का प्रसंस्करण करना, बिस्किट बनाना समेत विभिन्न प्रकार के स्वरोजगार का प्रशिक्षण दिया जाता है। ::::लाभार्थी से बातचीत मैंने महात्मा गांधी खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत राजकीय विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र में 1 महीने का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद मैंने खाद्य प्रसंस्करण के रूप में आचार, मुरब्बा, च्यवनप्राश आदि अपने घर में ही बनाना शुरू किया। धीरे धीरे इसमें सफलता मिलने लगी। आज मैं औसतन महीने में 18 से 20 हज़ार तक कमा लेता हूं। अचार निर्माण की वजह से मुझे राज्यपाल के द्वारा भी पुरस्कार हासिल हो चुका है। वही विभिन्न स्थानों पर आयोजित मेले में भी मेरे उत्पाद को प्रथम पुरस्कार हासिल हुआ है। सच्चिदानंद पांडे, डायरेक्टर, मां वैष्णवी आचार मुरब्बा लघु उद्योग :::वर्जन महात्मा गांधी खाद्य प्रसंस्करण ग्राम स्वरोजगार योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण लेकर कई लोग अपना रोजगार शुरू कर चुके हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में इस योजना के सात लाभार्थी हैं। एक मासीय खाद्य प्रसंस्करण एवं उद्यमिता प्रशिक्षण बिल्कुल निशुल्क है। प्रशिक्षण पाने के बाद अगर कोई उद्योग लगाना चाहता है तो उन्हें सरकार की ओर से तीन खरीद के लिए 50% या अधिकतम एक लाख रुपये अनुदान भी दिया जाता है। पवन कुमार, प्रधानाचार्य, राजकीय खाद्य विज्ञान प्रशिक्षण केंद्र
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पवन कुमार - फोटो : AMAR UJALA
पवन कुमार
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