गोरखनाथ मंदिर पर हमले के तार आतंकी संगठन आईएसआईएस से जुड़े थे। 3 अप्रैल, 2022 को मंदिर परिसर में पीएसी जवानों पर बांके से हमला किया गया था। इस मामले में आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग करने वाले मुर्तजा को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।
वैश्विक संस्था, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन भुगतान सेवाओं के जरिये आतंकवादियों को पैसों और उपकरणों की मदद के ताजे खुलासे से साल 2022 में हुए गोरखनाथ मंदिर पर हमले की याद ताजा हो गई।
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इस दहशत भरी कार्रवाई में भी आतंकी फंड के इस्तेमाल का पता चला था। इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) से ऑनलाइन लेनदेन किया गया था। तब अमर उजाला ने इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया था। मामले में दोषी मुर्तजा अहमद अब्बासी को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है।
बता दें तीन अप्रैल, 2022 की शाम सवा सात बजे गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पीएसी जवानों पर आईएसआईएस की विचारधारा से प्रभावित आतंकी मुर्तजा अहमद अब्बास ने धारदार बांका से हमला कर दिया था।
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हमलावर मुर्तजा ने जवानों से हथियार छीनने का भी प्रयास किया। मरने-मारने पर उतारू मुर्तजा ने बांके से वार कर दो जवानों को बुरी तरह जख्मी कर दिया। मौके पर पहुंचे दूसरे जवानों ने किसी तरह मुर्तजा को काबू में किया।
आतंकी मुर्तजा को न्यायालय ले जाते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
4 अप्रैल, 2022 को इस मामले में गोरखनाथ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, गोरखनाथ मंदिर की सुरक्षा में तैनात पीएसी के जवानों पर हमले के दौरान मुर्तजा ने बांका लहराते हुए व नारा-ए-तकबीर, अल्लाह हू अकबर के नारे भी लगाए।
इस आधार पर तत्कालीन एडीजी गोरखपुर जोन अखिल कुमार ने मामले को आतंकी साजिश माना। अगले दिन तत्कालीन अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने एडीजी की बात की पुष्टि भी कर दी।
जांच आगे बढ़ी तो शुरू में मानसिक रूप से विक्षिप्त दिखने का मुर्तजा का नाटक भी पकड़ा गया। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूरे मामले की गहनता से जांच के आदेश दिए।
एटीएस, एसटीएफ और अन्य खुफिया एजेंसियों ने मुर्तजा का नेटवर्क खंगालना शुरू किया तो उसकी यात्रा की फेहरिस्त काफी लंबी निकली। मुर्तजा कई बार कोयंबटूर, जामनगर, मुंबई, दिल्ली और नेपाल के लुंबिनी गया था।
जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि मुर्तजा न सिर्फ प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) के संपर्क में था बल्कि उसे आर्थिक मदद भी दे रहा था।
जाकिर नाइक को करता था फॉलो
जांच के दौरान मुर्तजा अब्बासी के पास से कई दस्तावेज भी मिले थे। इससे ये पता चला था कि वो कट्टरपंथी जाकिर नाइक का फैन भी है। आईआईटी मुंबई से केमिकल इंजीनियरिंग करने वाले मुर्तजा के बैग से अरबी भाषा की मजहबी किताब और गोरखनाथ मंदिर का नक्शा मिला था। उसके लैपटॉप से कट्टरपंथी जाकिर नाइक के कई वीडियो मिले। मुर्तजा मुंबई और नेपाल के कई संदिग्ध लोगों से चैटिंग करता था।
आईएसआईएस का तरीका है लोन वुल्फ अटैक
मुर्तजा ने गोरखनाथ मंदिर परिसर में जिस तरीके से आतंकी कार्रवाई की उसे लोन वुल्फ अटैक कहा जाता है। इसमें हमलावर भेड़िए की तरह अकेले किसी धारदार हथियार से हमला करता है। जानकार बताते हैं कि हमले का यह तरीका इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया (आईएसआईएस) का है।
एनआईए/एटीएस कोर्ट सुना चुकी है मौत की सजा
लखनऊ में एनआईए/एटीएस की विशेष अदालत ने 30 जनवरी, 2023 को गोरखनाथ मंदिर में हमले के दोषी मुर्तजा अब्बासी को मौत की सजा सुनाई। 60 दिन में सुनवाई पूरी करने के बाद विशेष न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने मुर्तजा को भारतीय दंड संहिता ( तत्कालीन आईपीसी) की धारा 121 (भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना या युद्ध छेड़ने का प्रयास करना) और धारा 307 (हत्या का प्रयास) के तहत दोषी ठहराया था।