नियम के अनुसार, सौरभ (काल्पनिक नाम) सोने का अवैध व्यापारी है। बिना लिखा-पढ़ी वाला सोना अवैध तरीके से उसने बाहर से मंगाकर दुकानदार को दे दिया। दो लाख रुपये (करीब 30 ग्राम से अधिक) से अधिक का अवैध सोना यदि दुकानदार को दिया तो इसे खपाने के लिए ई-वे बिल का रिकाॅर्ड रखना होगा। यदि जीएसटी की टीम दुकान में बिना ई-वे बिल के रखे सोने या अन्य आभूषण को पकड़ती है तो उसे अवैध मान लिया जाएगा। इस आधार पर सोने की जब्ती और अन्य कार्रवाई की जाएगी।
शहर में नगों के अवैध व्यापार का धंधा खूब चलता है। दुकानदार और ग्रह-नक्षत्रों के ज्ञाता राजस्थान या अन्य इलाकों से इसे बिना लिखा-पढ़ी के मंगवाते थे। इसमें उन्हें कहीं कागजों की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसका लाभ दुकानदार और ग्रहों के जानकार उठाते थे। जैसे, शहर में हीरे के रत्न की जगह मोजोनाइट को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
हीरे के एक कैरेट रत्न का दाम करीब ढाई लाख रुपये है। जबकि इतने साइज के मोजोनाइट की कीमत तीन से चार हजार रुपये है। बिना लैब टेस्टिंग से परखे इन आभूषणों को खरीदना नुकसानदायक हो सकता है। सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि ग्राहक बड़ी दुकानों या ग्रहों के जानकार से अगर हीरा खरीद रहे हैं तो लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट जरूर लें। अगर नहीं लिया तो संभव है उनके साथ छल हुआ हो।