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Exclusive: दुकान में रखा सोना वैध है या अवैध, अब जीएसटी भी जांचेगा

Wed, 09 Aug 2023 02:36 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।

सार

शहर में नगों के अवैध व्यापार का धंधा खूब चलता है। दुकानदार और ग्रह-नक्षत्रों के ज्ञाता राजस्थान या अन्य इलाकों से इसे बिना लिखा-पढ़ी के मंगवाते थे। इसमें उन्हें कहीं कागजों की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसका लाभ दुकानदार और ग्रहों के जानकार उठाते थे।
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GST - फोटो : Istock
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विस्तार
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सराफा की दुकानों में रखा सोना वैध है या अवैध, अब इसकी जांच वस्तु एवं सेवा कर विभाग (जीएसटी) भी करेगा। नए नियमों के तहत दुकानदार प्रदेश के अंदर एक से दूसरे दुकान पर दो लाख रुपये से अधिक का सोना बिना कागज के नहीं ले जा सकेंगे। इसके लिए ई-वे बिल बनवाना पड़ेगा। यदि सोना ले जाते वक्त ई-वे बिल नहीं मिला तो जीएसटी विभाग इसे अवैध मानकर जब्त कर लेगा। अब तक जीएसटी की टीम सिर्फ पंजीकरण फर्म के लेनदेन के रिकार्डों की ही जांच कर सकती थी। इससे वैध और अवैध सोने को खपाने वाले व्यापारियों की चांदी थी।

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सोने-चांदी के साथ अन्य रत्नों की जांच अब तक सीधे तौर पर डायरेक्ट्रेट ऑफ रेवेन्यू (डीआरआई) करती थी। इसमें अवैध तरीके से खरीदे गए सोने पर कार्रवाई होती थी, लेकिन इसे अवैध साबित करने के लिए डीआरआई को संबंधित फर्म के खिलाफ प्रपत्रों का संकलन करना पड़ता था। इस लंबी प्रक्रिया की वजह से कारोबारी अपना व्यापार झूमकर करते थे। अवैध सोना खपाने वाले कोलकाता से ट्रेन या अन्य मार्गों से प्रदेश में आ जाते थे।

डीआरआई के अलावा दूसरे विभाग यदि रास्तों में इनके अवैध माल को पकड़ लेते थे तो व्यापारी को भी पता होता था कि कच्ची पर्ची या फर्जी पंजीकरण वाली रसीद दिखाकर आसानी से बच सकते हैं। शासन के पास इस तरह की शिकायतें बार-बार पहुंच रही थीं। ऐसे में केंद्र सरकार के निर्देश पर जीएसटी काउंसिल की बैठक में कीमती धातुओं के परिवहन में ई-वे बिल लागू करने के प्रस्ताव को रखा गया था।
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ऐसे लगेगी अवैध सोने की खपत पर रोक

नियम के अनुसार, सौरभ (काल्पनिक नाम) सोने का अवैध व्यापारी है। बिना लिखा-पढ़ी वाला सोना अवैध तरीके से उसने बाहर से मंगाकर दुकानदार को दे दिया। दो लाख रुपये (करीब 30 ग्राम से अधिक) से अधिक का अवैध सोना यदि दुकानदार को दिया तो इसे खपाने के लिए ई-वे बिल का रिकाॅर्ड रखना होगा। यदि जीएसटी की टीम दुकान में बिना ई-वे बिल के रखे सोने या अन्य आभूषण को पकड़ती है तो उसे अवैध मान लिया जाएगा। इस आधार पर सोने की जब्ती और अन्य कार्रवाई की जाएगी।

 
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अब नग के बहाने लोग पत्थर नहीं पकड़ा पाएंगे

शहर में नगों के अवैध व्यापार का धंधा खूब चलता है। दुकानदार और ग्रह-नक्षत्रों के ज्ञाता राजस्थान या अन्य इलाकों से इसे बिना लिखा-पढ़ी के मंगवाते थे। इसमें उन्हें कहीं कागजों की जरूरत नहीं पड़ती थी। इसका लाभ दुकानदार और ग्रहों के जानकार उठाते थे। जैसे, शहर में हीरे के रत्न की जगह मोजोनाइट को धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।

हीरे के एक कैरेट रत्न का दाम करीब ढाई लाख रुपये है। जबकि इतने साइज के मोजोनाइट की कीमत तीन से चार हजार रुपये है। बिना लैब टेस्टिंग से परखे इन आभूषणों को खरीदना नुकसानदायक हो सकता है। सराफा मंडल के अध्यक्ष गणेश वर्मा ने बताया कि ग्राहक बड़ी दुकानों या ग्रहों के जानकार से अगर हीरा खरीद रहे हैं तो लैब टेस्टिंग की रिपोर्ट जरूर लें। अगर नहीं लिया तो संभव है उनके साथ छल हुआ हो।
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