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Gorakhpur News: एक साल से बिना पंजीकरण के ही चल रहा था गोल्ड अस्पताल

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पिछले साल अप्रैल में पंजीकरण खत्म हो गया था, अब नए पंजीकरण के लिए किया है आवेदन
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तीन दिन पहले दो डॉक्टरों की टीम ने जाकर किया था भौतिक सत्यापन
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट के सामने मेन रोड पर ही एक अवैध अस्पताल करीब सवा साल से संचालित था, लेकिन न तो वहां कोई जांच हुई, न ही कार्रवाई। इस साल मई में संचालक ने नए पंजीकरण के लिए आवेदन किया तो दो डॉक्टरों की टीम वहां पहुंचकर सत्यापन करके भी लौट आई। इसी अस्पताल में पिछले महीने ग्रामीण क्षेत्र से महिला मरीज लाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट तक सीएमओ को नहीं भेजी गई। जब डीएम को जानकारी हुई, तब उन्होंने अपने स्तर से टीम भेजकर अस्पताल को सील कराया।
शहर में अवैध रूप से नर्सिंग होम का धंधा खूब फल-फूल रहा है। गली-गली में अस्पताल खोलकर डॉक्टरों के बोर्ड टांग दिए गए हैं। इस पर किसी चर्चित डॉक्टर के नाम लिखवा देते हैं अथवा उन्हें दिल्ली या मुंबई के किसी बड़े अस्पताल का बता देते हैं। इन अस्पतालों का सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से खूब प्रचार भी होता है। अस्पताल के बोर्ड देखकर वहां खुद भी मरीज पहुंचने लगते हैं।
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज के उत्तरी गेट के पास संचालित गोल्ड अस्पताल भी इसी तरह से संचालित था। इस अस्पताल में लखनऊ और दिल्ली के कई डॉक्टरों के अलावा गोरखपुर के डॉक्टरों के भी आकर मरीजों का इलाज करने का दावा किया जाता था।
सूत्रों ने बताया कि इस अस्पताल का पंजीकरण वर्ष 2021-22 में हुआ था। इसके बाद 22-23 के लिए नवीनीकरण भी हो गया, लेकिन जब पिछले साल मरीज माफियाओं के मामले खुलने लगे तो इस अस्पताल के संचालक ने पंजीकरण नहीं कराया। वजह यह कि इनके यहां जिस डॉक्टर की डिग्री का इस्तेमाल होता था, वह यहां आते ही नहीं थे। बल्कि केवल नाम के एवज में हर महीने 60 हजार रुपये फीस लेते थे। करीब एक साल तक बिना नवीनीकरण के ही यह अस्पताल संचालित होता रहा।
इस साल मई में जब नियमों में कुछ ढील मिलने की जानकारी हुई तो फिर नवीनीकरण के लिए प्रयास किया गया, लेकिन नियमानुसार नहीं होने के चलते ऐसा नहीं हो पाया। इसके बाद नवीन पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया। पंजीकरण से पहले सीएमओ दफ्तर की तरफ से नामित दो डॉक्टरों की टीम ने तीन दिन पहले ही अस्पताल का भौतिक सत्यापन किया था।

आशा कार्यकर्ताओं की बैठक से आया चर्चा में
एक साल से संचालित इस अस्पताल पर प्रशासन की नजर तब पड़ी, जब यहां मरीजों को बुलाने के लिए आशा कार्यकर्ताओं की बैठक यहां हुई। आशा कार्यकर्ता अपने मरीजों को सीधे सरकारी अस्पताल ही भेजती हैं और उनकी मीटिंग आदि भी सरकारी परिसर में ही होती है। निजी नर्सिंग होम में बैठक की जानकारी होने पर कुछ आशा कार्यकर्ता इसका विरोध करते हुए मौके पर पहुंचीं और हंगामा करने लगीं। इस प्रकरण में सीएमओ ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई लेकिन इस बार कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट नहीं दी।
कर्मचारी पकड़ा गया तो एक अस्पताल ने बदल लिया नाम
मार्च में बीआरडी के डॉक्टरों ने अस्पताल से मरीज ले जाने आए एक दलाल को गाड़ी व मरीज समेत पकड़कर पुलिस चौकी को सौंप दिया था। पुलिस ने आरोपियों से रातभर पूछताछ की। इसके बाद अगली सुबह कहानी बदल गई। पुलिस ने केस इसलिए दर्ज नहीं किया कि इन्हें पकड़ने वाले मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने तहरीर नहीं दी। दूसरे दिन सभी आरोपियों को छोड़ दिया गया। पकड़े गए आरोपियों में से एक मेडिकल कॉलेज के नजदीक ही संचालित एक निजी नर्सिंग होम का कर्मचारी था और मरीजों को उसी नर्सिंग होम में ले जाने आया था। पुलिस को इसकी जानकारी थी, लेकिन तहरीर का अभाव बताकर उसे छोड़ दिया गया। इसके बाद उस अस्पताल संचालक ने अस्पताल का नाम ही बदल दिया।
सील अस्पतालों के मकान मालिक बन रहे ढाल
बीते फरवरी-मार्च में शहर में पांच अस्पताल सील किए गए, जबकि ग्रामीण क्षेत्र में भी 8 अस्पताल सील किए गए। मेडिकल कॉलेज रोड के दो अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं मिले। इनमें से एक अस्पताल के मकान मालिक ने भवन को सील मुक्त कराने की गुहार लगाई है। चौरीचौरा क्षेत्र में सील किए गए एक अस्पताल के मकान मालिक ने हाईकोर्ट में यह दलील दी कि अस्पताल सील करने से उसके घर का आवागमन बाधित हो गया है। इस पर हाईकोर्ट ने रास्ता खोलने का आदेश दिया। वहां सील हटने के बाद सील हुए अन्य अस्पतालों के मालिक भी या तो कोर्ट चले गए हैं, अपने अन्य साथियों से चर्चा कर जाने की तैयारी में हैं।
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किसी डॉक्टर का अत्यधिक प्रचार भी नियम विरुद्ध है, लेकिन माफिया विभिन्न माध्यमों से अपने चहेते डॉक्टर की पहले खूब प्रशंसा कराते हैं और फिर उसकी आड़ में अपना धंधा सजा लेते हैं। गोल्ड अस्पताल में ही आशा कार्यकर्ताओं के बैठक का मामला चर्चा में आया था, उसके बाद से ही अस्पताल के बारे में जानकारी जुटाई जा रही थी। वहां भर्ती मरीजों की हालत ठीक है।
-डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, सीएमओ
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