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Gorakhpur News: गोड़धोइया नाला की हिल गई नींव, भारी वाहन गुजरें तो कांपते हैं मकान- अब लगता है डर

Thu, 02 May 2024 06:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

जंगल छत्रधारी से राजनगर तक चार किमी की लंबाई में गोड़धोइया नाले का निर्माण कार्य 31 मई तक पूरा करना है। यह स्थान राजेश श्रीवास्तव के मकान से करीब 200 मीटर आगे तक ही है। उसके बाद मकानों की संख्या अधिक है, इस कारण जल निगम और कार्यदायी संस्था के अधिकारी आगे कार्य करने का जोखिम नहीं उठाएंगे, क्योंकि वहां मकानों की संख्या अधिक है।
 
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निर्माणाधीन गोड़धोईया नाला और क्षतिग्रस्त मकान। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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गोड़धोइया नाला निर्माण के दौरान किनारे के मकानों को बचाने की बड़ी चुनौती है। मकानों की नींव हिल चुकी है। यही कारण है कि नाले के किनारे के मकानों में दरारें आ रही हैं और उधर से भारी वाहनों के गुजरते ही मकानों में कंपन हो रहा है। यह स्थिति देखकर मकान मालिकों के साथ अधिकारी भी चिंतित हैं।
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अभियंता तो दबी जुबान से कह रहे हैं कि इन मकानों की सुरक्षा के लिए ठोस उपाय करने होंगे, क्योंकि गोरखपुर क्षेत्र भूकंप के लिहाज से भी संवेदनशील है। जंगल छत्रधारी से राजनगर तक चार किमी की लंबाई में गोड़धोइया नाले का निर्माण कार्य 31 मई तक पूरा करना है। यह स्थान राजेश श्रीवास्तव के मकान से करीब 200 मीटर आगे तक ही है।

उसके बाद मकानों की संख्या अधिक है, इस कारण जल निगम और कार्यदायी संस्था के अधिकारी आगे कार्य करने का जोखिम नहीं उठाएंगे, क्योंकि वहां मकानों की संख्या अधिक है।
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एसडीएम मृणाली अविनाश जोशी ने मकानों की सुरक्षा के मामले में जांच समिति गठित की है, जिसमें लोक निर्माण विभाग, जलनिगम एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों की टीम ने संवेदनशील 14 मकानों के मुआवजे की रिपोर्ट तैयार की है, जबकि पहले इन मकानों के उन हिस्से का मुआवजा दिया जा चुका है, जो नाला निर्माण क्षेत्र में आए थे।

इसके साथ ही नाले के अन्य क्षेत्र में भी मकानों की सुरक्षा पर मंथन किया जा रहा है, क्योंकि निर्माण से पहले 300 से अधिक मकानों को मुआवजा दिया गया है, जो नाले के किनारे हैं।

राजनगर में राजेश श्रीवास्तव के घर में दरार आ गई है और लोहे के गर्डर लगाकर मकान को बचाने की पूरी कोशिश की जा रही है। उनके दरवाजे से भारी वाहन गुजरते हैं तो दीवारों में कंपन होती है। उनके घर के पास फौजदार सिंह के घर के पास भी दीवार में दरार आई है।

उनका कहना है कि भारी वाहनों से मकानों में कंपन हो रही है। काम होना चाहिए, लेकिन मकानाें की सुरक्षा भी होनी चाहिए। इसी प्रकार राजनगर के ही चंद्रजीत सिंह के घर की दीवार में भी हल्की दरार नजर आने लगी है। वहां के निवासी कमलेश चौधरी ने कहा कि नाला निर्माण के साथ सुरक्षा का विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

नाले की सतह से पांच फिट नीचे हो पाइलिंग
नाले के किनारे मकानों को तोड़े जाने के बाद कुछ लोगों ने लापरवाही की है, जबकि इस कारण जन-धन हानि की आशंका है। चार दिन पहले ही रुस्तमपुर में नाला निर्माण के दौरान तीन मंजिला मकान धराशायी हो गया था। कुछ लोगों ने अपने मकान का पीछे का हिस्सा तोड़ा और राजगीर की सलाह पर पिलर बना दिया।

उन्होंने नींव के पास मिट्टी रोकने का उपाय नहीं किया और ऊपर एक मंजिल और बना ली। मकान का पिलर 5-6 फीट नीचे है, जबकि उससे दो-चार फिट दूर 15 फिट गहरा नाला खोदा गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे मकान में पूरी मजबूती नहीं आएगी और जोखिम का भय बना रहेगा।

आर्किटेक्ट संजय मणि त्रिपाठी ने बताया कि नाले के किनारे के मकानों में पिलर के बजाए पाइलिंग होनी चाहिए। यह नाले की गहराई से पांच फिट नीचे से शुरू होगा तो मकान सुरक्षित होगा। गोड़धोइया नाले के आसपास की तस्वीर बयां कर रही है कि मकानों के सुरक्षा की गारंटी नहीं है।
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