गोरखनाथ मंदिर में चल रहे सात दिवसीय श्रीराम कथा की पूर्णाहुति
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजय नाथ स्मृति भवन सभागार में सात दिवसीय श्रीराम कथा का रविवार को समापन हुआ। सीएम योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में कथा व्यास संत बालकदास ने कथा सुनाते हुए कहा की भगवान का जन्म ही जन कल्याण के लिए होता है।
उन्होंने शबरी प्रसंग में नवधा भक्ति के उपदेश की मार्मिक व्याख्या की। प्रथम भक्ति संत सत्संग की व्याख्या करते हुए कहा कि संत मिलन से मूढ़ मान्यताएं टूटती हैं। संत वे होते हैं जिनके पास बैठने पर हमारे अंतःकरण में ईश्वर के प्रति जिज्ञासा पैदा होती है। दूसरी प्रेम भक्ति की व्याख्या करते हुए कहा कि भगवान की लीला-प्रसंगों का चिंतन व गुणगान भक्ति साधना का सबसे सुलभ मार्ग है। इसलिए भगवान पर पूरा विश्वास करते हुए उनकी सच्ची भक्ति करनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने सद्गुरु की सेवा को जिस भक्ति के रूप में बताई वह भक्ति उनके पूरे जीवन काल में दिखती है। कार्यक्रम में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, श्रीरामजानकी हनुमान मंदिर के महंत रामदास समेत कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद आदि मौजूद रहे।
आरती के साथ श्रीराम कथा का समापन
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष्य में 15 जुलाई से चल रही श्रीराम कथा का समापन व्यासपीठ पर विराजमान श्रीरामचरित मानस ग्रंथ की आरती से किया गया। सबसे पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आरती उतारी। उन्होंने कथाव्यास बाबा बालकदास के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हर व्यक्ति को ऐसी कथाओं के श्रवण के लिए कुछ समय जरूर निकालना चाहिए।