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Gorakhpur News: जीवन में माता-पिता पहले गुरु : सीएम योगी

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गोरखनाथ मंदिर में आयोजित श्रीरामकथा के विश्राम और गुरु पूर्णिमा महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जीवन में माता-पिता पहले गुरु हैं। इसके बाद स्कूली शिक्षक, पुरोहित-कुलगुरु, बड़ा भाई और ऋषि-संतों की परंपरा, गोत्रों की परंपरा भी गुरु परंपरा में सम्मिलित होती है। उन्होंने कहा कि हम जैसा कार्य करेंगे, परिणाम भी उसी के अनुरूप मिलेगा। अच्छा कार्य करेंगे तो अच्छा फल मिलेगा और गलत काम करेंगे तो उसका फल भी हमें ही भुगतना होगा।
सीएम योगी रविवार को गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन में विगत 15 जुलाई से चल रही श्रीरामकथा के विश्राम सत्र और गुरु पूर्णिमा महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। यह महर्षि कृष्ण द्वैपायन व्यास की जयंती है, जिनकी कृपा से वैदिक साहित्य प्राप्त हुए हैं। उन्होंने वेदों, पुराणों और अनेक महत्वपूर्ण शास्त्रों को उपलब्ध कराया है।
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उन्होंने कहा कि 5000 वर्ष पहले महर्षि व्यास इस धराधाम पर थे। उस कालखंड में उन्होंने कई पीढ़ियों का प्रतिनिधित्व किया। अनेक ग्रंथों की रचना कर उसे वर्तमान पीढ़ी के मार्गदर्शन के लिए भी अनुकूल बना दिया। भारत के अलावा 5000 वर्ष का इतिहास दुनिया में किसी के पास नहीं है। वर्तमान समय द्वापर और कलयुग का संधिकाल है। महाभारत के युद्ध के बाद महर्षि वेदव्यास ने श्रीमद्भागवत पुराण रचा जो मुक्ति और मोक्ष के मार्ग पर चलने को प्रेरित करने वाला पवित्र ग्रंथ है।

भगवान कृष्ण ने निष्काम कर्म की दी प्रेरणा
सीएम योगी ने कहा कि भगवान श्रीराम ने जीवन में मर्यादा को महत्व दिया। हर कार्य की लक्ष्मण रेखा तय की, संबंधों को मर्यादित तरीके से जीना सिखाया। इसी तरह भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म की प्रेरणा दी। आज अधिकतर लोग कम कर्म के बदले अधिक हाईलाइट होने के प्रयास में रहते हैं। जबकि भगवान श्रीकृष्ण ने निष्काम कर्म की प्रेरणा दी है। यानी कर्म करो, फल की चिंता मत करो। हमारे शास्त्र और गुरु परंपरा में भी कहा गया है- अवश्यमेव भोक्तव्यं कृतं कर्म शुभाशुभम्। अर्थात जैसा कर्म करेंगे, उसके अनुरूप फल से वंचित नहीं रहेंगे। जो करेंगे, उसके अनुरूप परिणाम अवश्य भोगना पड़ेगा।
मनुष्य सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ कृति, इसे अपने कर्म से साबित भी करना होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि मान्यता है कि मनुष्य इस सृष्टि की सर्वश्रेष्ठ कृति है। इस मान्यता को अपने कार्यों से साबित करने का दायित्व भी मनुष्य का ही है। हमारे शास्त्र और हमारी ऋषि परंपरा इसी दायित्व का बोध कराने वाली है। ऋषि परंपरा और अवतारी विभूतियों के मार्ग का अनुसरण करते हुए हमें ऐसा कार्य करना चाहिए जो समाज, राष्ट्र और धर्म के अनुकूल हो। ऐसा कार्य खुद व परिवार के अनुकूल आप ही हो जाता है।
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कार्यक्रम में गोरखनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी योगी कमलनाथ, देवीपाटन शक्तिपीठ के महंत मिथिलेशनाथ, महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के अध्यक्ष प्रो. यूपी सिंह, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, श्रीरामजानकी हनुमान मंदिर के महंत रामदास समेत कई जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, प्रबुद्धजन व बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की सहभागिता रही।
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