फुफुक्टा के अध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने विभिन्न विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शिक्षक संघ अध्यक्षों के साथ शिक्षक जांच प्रकरण पर ऑनलाइन बैठक की। जिसमें गोरखपुर विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. विनोद कुमार सिंह ने कई मुद्दे उठाए। डॉ. सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय में शासनादेश कार्यपरिषद द्वारा लागू किया जाना चाहिए और सक्षम अधिकारियों के द्वारा ही जांच होनी चाहिए।
उन्होंने कोरोना काल के बाद जांच कराने की वकालत की। उक्त सभी बिंदुओं को फुफुक्टा ने अपने विरोध-प्रस्ताव में शामिल किया है। यह विश्वास दिलाया है कि उच्च शिक्षा मंत्री से मिलकर इस जांच समिति का विरोध दर्ज कराएंगे।
जांच से परेशानी की वजह कुछ और तो नहीं
शिक्षकों के अभिलेखों की जांच को लेकर विश्वविद्यालय में चर्चाओं का बाजार गर्म है। शिक्षक जांच कराने से परेशान हैं। इस परेशानी की असल वजह कुछ और ही है। चर्चा यह भी है कि जांच में कुछ शिक्षकों की बदली गई जन्मतिथि भी पकड़ में आ सकती है।
कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने वरिष्ठता के खेल में इसे बदलवा भी दिया था। वहीं यह भी चर्चा है कि कुछ शिक्षकों ने नौकरी ज्वाइन करने के बाद पीएचडी की है। नए शिक्षकों में जाति प्रमाणपत्र और नेट के प्रमाण पत्र को लेकर भी शिकायत पूर्व में हो चुकी है। हालांकि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि क्या सही है और क्या फर्जी?