टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स
-2026 में दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय व मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय उपलब्धि
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (डीडीयूजीयू) व मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्याल ने टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स-2026 में सफलता अर्जित करते हुए वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। दोनों विश्वविद्यालयों ने पिछले वर्ष के 1500 प्लस बैंड से सुधार करते हुए इस वर्ष 1001–1500 बैंड में स्थान प्राप्त किया है।
डीडीयू की ओर से पोषण एवं खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा संरक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, सामाजिक समावेशन तथा राष्ट्रीय सेवा योजना, राष्ट्रीय कैडेट कोर एवं विभिन्न विस्तार कार्यक्रमों के माध्यम से व्यापक जनहितकारी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। साथ ही सतत विकास से जुड़े शोध, नवाचार, जन-जागरूकता एवं सामुदायिक सहभागिता को भी निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है।
एमएमएमयूटी को वर्ष 2026 की रैंकिंग में वैश्विक स्तर पर 1001–1500 रैंक बैंड में स्थान मिला है, जो सतत विकास के प्रति उसकी प्रतिबद्धता तथा बढ़ती अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को दर्शाता है। यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनिंदा विश्वविद्यालयों को ही इस रैंकिंग में स्थान प्राप्त हुआ है। सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि विश्वविद्यालय की उपलब्धियां केवल अकादमिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह वैश्विक चुनौतियों के समाधान और सतत विकास को आगे बढ़ाने में भी सार्थक योगदान दे रहा है। रैंकिंग परिणामों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने कई सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। सतत विकास लक्ष्य-7 (अफोर्डेबल एंड क्लीन एनर्जी) के अंतर्गत एमएमएमयूटी ने वर्ष 2025 के 601–800 रैंक बैंड से आगे बढ़कर वर्ष 2026 में 401–600 रैंक बैंड प्राप्त किया है। यह स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान, सतत प्रौद्योगिकियों तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विश्वविद्यालय के बढ़ते योगदान को दर्शाता है। सतत विकास लक्ष्य-9 (इंडस्ट्री, इनोवेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर) के अंतर्गत विश्वविद्यालय को 401–600 रैंक बैंड में स्थान मिला है, जो तकनीकी नवाचार, उद्योग-सहयोग, उद्यमिता तथा आधारभूत संरचना विकास पर उसके विशेष बल को रेखांकित करता है। वहीं सतत विकास लक्ष्य-17 (पार्टनरशिप्स फॉर द गोल्स) में विश्वविद्यालय ने वर्ष 2025 के 1501प्लस बैंड से उल्लेखनीय सुधार करते हुए वर्ष 2026 में 1001–1500 बैंड प्राप्त किया है, जो सतत विकास से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोगों के विस्तार को दर्शाता है। विश्वविद्यालय का मूल्यांकन सतत विकास लक्ष्य-3 (गुड हेल्थ एंड वेल-बीइंग) के अंतर्गत भी किया गया।
रैकिंग में शामिल हो सके प्रदेश के सिर्फ पांच विश्वविद्यालय
डीडीयू ने संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य-2 भूख-मुक्त विश्व तथा सतत विकास लक्ष्य-7 सस्ती एवं स्वच्छ ऊर्जा श्रेणियों में विश्व के शीर्ष 500 विश्वविद्यालयों में स्थान बनाया है। इस वर्ष घोषित टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स में विश्व के 1,603 विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन किया गया, जिनमें 110 भारतीय विश्वविद्यालयों को स्थान प्राप्त हुआ। उत्तर प्रदेश के राज्य विश्वविद्यालयों में केवल पांच विश्वविद्यालय इस प्रतिष्ठित वैश्विक रैंकिंग में स्थान बना सके हैं। रैंकिंग्स में विश्वविद्यालयों का मूल्यांकन संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में उनके योगदान के आधार पर किया जाता है। इस मूल्यांकन में शोध, शिक्षण, संस्थागत प्रबंधन एवं संसाधन संरक्षण तथा सामुदायिक सहभागिता एवं विस्तार गतिविधियों को प्रमुख आधार माना जाता है। छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर (801–1000), महात्मा ज्योतिबा फुले रोहिलखंड विश्वविद्यालय, बरेली (801–1000), मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, गोरखपुर (1001–1500), दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (1001–1500) तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी (1001–1500) शामिल हैं।
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यह उपलब्धि पूरे विश्वविद्यालय परिवार के सामूहिक प्रयास, समर्पण और उत्कृष्टता के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय भविष्य में भी सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में और अधिक प्रभावी योगदान देते हुए राष्ट्रीय एवं वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा : प्रो़ पूनम टंडन, कुलपति डीडीयू
टाइम्स हायर एजुकेशन सस्टेनेबिलिटी इम्पैक्ट रैंकिंग्स 2026 में एमएमएमयूटी का शामिल होना शैक्षणिक उत्कृष्टता, प्रभावी शोध, नवाचार और सतत विकास के प्रति हमारी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण है। शोध हमारी प्रगति और अंतरराष्ट्रीय पहचान का आधार है। यह उपलब्धि हमारे शिक्षकों, शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों, अधिकारियों, कर्मचारियों, पूर्व छात्रों तथा सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है : प्रो. अनुपमा कौशिक शर्मा, कुलपति एमएमएमटीयू