अभियान थिएटर ग्रुप की ओर से रंग महोत्सव के तीसरे दिन धर्मवीर भारती के उपन्यास का किया गया मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। अभियान थिएटर ग्रुप की ओर से आयोजित पांच दिवसीय रंग महोत्सव के तीसरे दिन शुक्रवार को धर्मवीर भारती के लिखे और जाय मैसनाम मिताई की ओर से निर्देशित नाटक ''''अंधा युग'''' का मंचन किया गया। योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह के मुख्य मंच पर मंचित किए गए इस नाटक में दर्शकों को युद्ध-विनाश का दंश देखने को मिला तो करुणा-मानवता की सीख भी मिली। नाटक ने अहिंसा और एथिक्स का पाठ भी पढ़ाया। ट्रेजर आर्ट एसोसिएशन नई दिल्ली की शानदार प्रस्तुति दर्शकों के दिल में उतर गई।
नाटक महाभारत युद्ध के आखिरी दिन पर केंद्रित रहा। इसमें युद्ध की निरर्थक के साथ-साथ प्रतिहिंसा अपने उभार पर दिखी। नाटक में अश्वत्थामा इसी प्रतिहिंसा में अपने क्रूरतम रूप में आता है, तो गांधारी कृष्ण को मृत्यु का अभिशाप तक दे देती है। न्याय-अन्याय, आस्था-अनास्था, सत्ता और लोभ का अंधापन ही अंधायुग है। नाटक के जरिये यह दिखाने की सफल कोशिश हुई। दो घंटे 10 मिनट के नाटक को दर्शक अपलक देखते रहे। नाटक को जीवंत बनाने में साजिदा, सैफ, साहिल, जाय मैसनाम, मोहम्मद शहनवाज, मधुसूदन, कृत वर्मा के जोरदार अभिनय की महत्वपूर्ण भूमिका रही। मंच से परे कास्ट्यूम डिजाइन में साजिदा, लाइट में हिमांशु जोशी, साउंड में देबरती मजूमदार, सेट सज्जा में प्रकाश सिंह का विशेष योगदान रहा।
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चौथे दिन ''''राम की शक्तिपूजा'''' का मंचन
रंग महोत्सव के चौथे दिन यानी शनिवार को शाम छह बजे ''''नाटक में जीवन, समसामयिकता का दबाव और पारंपरिक शिल्प'''' विषय पर रंग-विमर्श होगा। विमर्श के वक्ता होंगे रंग निर्देशक व्योमेश शुक्ल और उनसे बातचीत करेंगे राजशेखर त्रिपाठी। आयोजन समिति के मीडिया समन्वयक नवीन पांडेय ने बताया कि विमर्श के बाद महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला द्वारा रचित काव्य ''''राम की शक्तिपूजा'''' पर आधारित नाटक की प्रस्तुति होगी। व्योमेश शुक्ल की ओर से निर्देशित यह नाटक वाणी थिएटर ग्रुप वाराणसी के कलाकारों द्वारा किया जाएगा।
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मादक द्रव्यों के सेवन से नहीं आ सकता अभिनय में निखार- पीयूष मिश्रा
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गोरखपुर । रंग महोत्सव के अंतर्गत शुक्रवार को रंग विमर्श कार्यक्रम में बेहतर रंगमंच की रेसिपी विषय पर सुप्रसिद्ध नाट्य कर्मी एवं फिल्म अभिनेता पीयूष मिश्रा से बातचीत की गई। वार्ताकार नीरज कुंदेर से चर्चा के दौरान पीयूष मिश्रा ने कहा कि रंगमंच करने के लिए पहले भी परेशानियां थीं और आज भी उतनी ही परेशानी है । जो भी अभिनय की दुनिया में आना चाहता है, उसे रंगमंच जरूर करना चाहिए। 4 साल 5 साल जमकर थिएटर करें तब सिनेमा ज्वॉइन करें। पीयूष मिश्रा ने कहा कि थिएटर में ऐसा माना जाता है कि मादक द्रव्यों के सेवन से अभिनय में निखार आता है, ऐसा कत्तई नहीं है। शराब पीकर आप कुछ नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि पढ़ाई सबको करनी चाहिए। बच्चों को 5 से 15 साल तक पढ़ाइए-सिखाए। 15 साल के बाद उनके ऊपर छोड़ दीजिए, वह क्या बनना चाहते हैं और क्या करना चाहते हैं। दर्शकों की मांग पर पीयूष मिश्रा ने अपने लिखे हुए गीत आरंभ है प्रचंड को सुनाया।