इसके बाद अवध कुमार गुप्ता ने 2500 वर्गफीट चार जून 2003 को, विजय लक्ष्मी गुप्ता ने 2450 वर्गफीट चार अप्रैल 2003 व सतीश चंद्र श्रीवास्तव ने 2450 वर्गफीट जमीन 20 सितंबर 2002 को पूर्ण भुगतान कर भूपेंद्र नाथ त्रिपाठी से रजिस्टर्ड बैनामा कराया है।
बताया कि जमीन पर टीन शेड बनवा लिए। चहारदीवारी बनवाकर काबिज भी हो गए, लेकिन कुछ दिन बाद विनोद उपाध्याय, संजय उपाध्याय, संतोष चौबे, प्रद्युम्न तिवारी व रोशन पांडेय आदि आए और चहारदीवारी तोड़ दी। जान से मारने की धमकी भी दी।
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आरोप है कि विनोद उपाध्याय व संजय उपाध्याय ने पिस्टल सटाकर कहा- जमीन वापस लेना है तो सभी लोग मिलकर हमें 20 लाख रुपये दो। मना करने पर आरोपियों ने जमीन पर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। धमकी दी कि यदि जमीन पर दिखाई दिए या पुलिस से शिकायत की तो परिवार सहित हत्या कर लाश को बिहार ले जाकर ठिकाने लगा दिया जाएगा। पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया है।
एक लाख रुपये के इनामी बदमाश विनोद उपाध्याय की तलाश में पुलिस लखनऊ तक पहुंची थी। विनोद की बेटी के जरिए उस तक पुलिस के पहुंचने की कोशिश भी नाकाम रही। पता चला कि केस दर्ज होने के बाद ही माफिया ने अपनी बेटी का नाम स्कूल से कटवा दिया। अब वह कहां है, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। पुलिस अब दूसरे माध्यमों से माफिया की तलाश में जुटी है।
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एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि माफिया विनोद और उसके साथियों पर एम्स थाने में रंगदारी मांगने व अन्य धाराओं में एक और केस दर्ज कर लिया गया है। माफिया की तलाश में पुलिस टीम लगी है, जल्द ही उसकी गिरफ्तारी की जाएगी।