गीडा (गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण) की लापरवाही से एक उद्यमी पिछले छह साल से कारखाना लगाने के लिए प्लॉट आवंटन को भटक रहा है। गीडा ने उन्हें दो बार प्लॉट तो आवंटित किया, लेकिन दोनों ही बार विवादित जगह होने की वजह से कब्जा नहीं मिल पाया। परेशान होकर अब उन्होंने मुख्यमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।
अक्रिया बेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर उद्यमी अशोक शॉ ने करीब एक दशक पहले गोरखपुर में प्लास्टिक बोरे की फैक्ट्री लगाने का प्लान बनाया था। करीब 20 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होने वाली फैक्ट्री में 150 से अधिक लोगों को रोजगार मिलना था। उद्योग स्थापित करने के लिए उन्हें तकरीबन तीन एकड़ जमीन की आवश्यकता थी।
साल 2013 में गीडा ने प्लॉटों के आवंटन के लिए विज्ञापन निकाला तो उन्होंने एक प्लॉट के लिए आवेदन किया। गीडा की ओर से उन्हें एलपीजी बॉटलिंग प्लांट के पास जनवरी 2014 में करीब पौने चार एकड़ जमीन आवंटित की गई। उस वक्त यह जमीन किसानों के कब्जे में थी। इस संबंध में उन्होंने गीडा प्रशासन को जानकारी दी।
इसके बाद उन्हें अगस्त 2014 में पावर हाउस के पीछे दो एकड़ का प्लॉट आवंटित किया गया, लेकिन इस जमीन तक जाने के लिए रास्ता भी नहीं था। साथ ही यह जमीन भी किसानों के कब्जे में थी। इस वजह से उन्हें जमीन नहीं मिल सकी। उद्यमी अशोक शॉ को आज भी प्लॉट आवंटित होने का इंतजार है। अब उन्होंने लघु उद्योग भारती गोरखपुर के अध्यक्ष दीपक कारीवाल के साथ मुख्यमंत्री योगी को ज्ञापन देकर प्लॉट आवंटित कराने की मांग की है।
गीडा सीईओ संजीव रंजन ने बताया कि मामला संज्ञान में नहीं है। साल 2014 के सभी प्लॉटों के मामलों को निस्तारित कर दिया गया है। विवादित जमीन के आवंटन जैसी कोई बात होगी तो उसका निस्तारण किया जाएगा।