जिस जमीन पर बारिश के दिनों में 15 से 20 फीट पानी भर जाता है। जमीन सरोवर वाली स्थिति में नजर आती है। ऐसी जमीनों को गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) ने उद्यमियों को फैक्ट्री लगाने के लिए आवंटित कर दिया है। ऐसे में आवंटियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
करीब दो साल पहले दिसंबर में गीडा ने 68 औद्योगिक भूखंडों को आवंटित किया था। अधिकांश जमीन सेक्टर 13 और 15 में आवंटित की गई है। इनमें डॉ. डीपी सिंह, अतुल सिंह समेत 68 उद्यमी शामिल हैं। आवंटन के बाद से इन उद्यमियों के सामने लो-लैंड की वजह से परेशानी पैदा हो गई।
डॉ. डीपी सिंह को सेक्टर-13 कालेसर में के-44 प्लॉट आवंटित किया गया, लेकिन जमीन करीब मुख्य सड़क से 15 फीट नीचे था। ऐसे में उद्यमी को मिट्टी भराने के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। इसी तरह सेक्टर 15 के डी-1/12 प्लॉट अतुल सिंह को आवंटित कर दिया। इससे उद्यमी के सामने अपनी फैक्ट्री लगाने में भी मुश्किल आ रही है।
आवंटी डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि जो जमीन आवंटित की गई है, वह काफी गहरी है। 15 फीट से ज्यादा मिट्टी डलवानी है। ऐसे में मिट्टी भराने में ही लाखों रुपये खर्च हो जाएंगे। गड्ढे वाली जमीन को लेकर कई बार आपत्ति की गई है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
आवंटी अतुल सिंह ने कहा कि फैक्ट्री लगानी है। लिहाजा मिट्टी की भराई खुद कर रहे हैं। आठ लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं, लेकिन मात्र 10 से 15 प्रतिशत ही भराई हो सकी है। आवंटित जमीन 18 से 20 फीट गहरी थी। मिट्टी भी नहीं मिल पा रही है। गीडा प्रशासन का कोई सहयोग भी नहीं मिल रहा।
गीडा सीईओ पवन अग्रवाल ने कहा कि ‘‘जैसा है वैसी ही स्थिति में’’ नियम और शर्त के साथ जमीन का आवंटन किया गया है। गीडा प्रशासन की ओर से जमीन तक मूलभूत सुविधाएं विकसित करनी है। इसके लिए काम किया जा रहा है। समस्या को दूर करने के लिए हर संभव सहयोग किया जा रहा है।