राधा बाबा के 108वें जन्मोत्सव पर गीता वाटिका में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा का समापन शुक्रवार को हुआ। वृंदावन से आए कथाव्यास मदनमोहन दास महाराज ने कहा कि हृदय में भगवान का निवास होता है, इसलिए हृदय को कामनाओं और वासनाओं से सुरक्षित रखना चाहिए।
ठाकुर जी को अहंकार पसंद नहीं है। वे किसी का अहंकार नहीं रहने देते। देवराज इंद्र के अहंकार को समाप्त करने के लिए भगवान श्री कृष्ण ने गिरिराज पूजन कराया ।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान को संतों की भक्ति करने वाले अधिक प्रिय हैं। एकादशी व्रत की बड़ी महिमा है। एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। उन्होंने कहा कि रस शब्द से ही रास बना है। रास में सभी रसों (शांत, दास्य, सख्य, वात्सल्य एवं मधुर) का समावेश है। रस रूप पर ब्रह्म परमात्मा श्रीकृष्ण की काम विजय लीला को ही रास कहते हैं। रास की कथा का श्रवण करने से हृदय रोग समाप्त हो जाते हैं।
कथा व्यास ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण को स्वाभाविकता ही प्रिय है। श्रीकृष्ण की बंसी की ध्वनि सुनकर गोपियां जिस स्थिति में थीं उसी स्थिति में श्रीकृष्ण मिलन के लिए निकल पड़ीं। किसी गोपी ने एक आंख में काजल लगाया था दूसरे में नहीं। कोई गोपी गोबर मिट्टी से सने हाथों ही निकल पड़ीं।