विकसित होने के बाद ऐसा दिखेगा सुमेर सागर ताल।
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किसी भी तरह की कानूनी अड़चन में फंसने से बचने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब सुमेर सागर ताल के सुंदरीकरण का कार्य शुरू कराने के पहले इसकी भूमि को लेकर न्यायालयों में चल रहे लंबित वादों का अध्ययन करेगा।
ताल की जमीन पर पिछले करीब तीन-चार दशकों से कब्जा चला आ रहा था जिसे प्रशासन ने करीब डेढ़ साल पहले खाली कराया था। इस कार्रवाई के लिए खिलाफ कई लोगों ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में केस दाखिल कर रखा है। कई मामले लंबित हैं।
जीडीए सुमेर सागर ताल का सुदंरीकरण कराने जा रहा है। इसे लेकर प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। गत बुधवार को हुई जीडीए बोर्ड बैठक के दौरान ताल और राप्ती किनारे के क्षेत्र को पर्यटन के लिहाज से विकसित करने की चर्चा के दौरान यह तय हुआ कि लंबित मामलों के अध्ययन के बाद ही सुमेर सागर ताल का सुंदरीकरण शुरू कराया जाए।