लखनऊ में प्रस्तावित ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 के लिए तैयार हो रही मजबूत पृष्ठभूमि
गोरखपुर। लखनऊ में आयोजित होने वाली ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी-5 (जीबीसी-5) के लिए गोरखपुर से करीब सात हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद जिले में लगभग 7200 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है।
उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक करीब पांच हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव औपचारिक रूप से प्राप्त हो चुके हैं। शेष प्रस्ताव प्रक्रियाधीन हैं और विभिन्न स्तरों पर स्वीकृति की कार्रवाई चल रही है। जिला प्रशासन और उद्योग विभाग की सक्रियता के चलते गोरखपुर पूर्वांचल के प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रस्तावित निवेश में डिस्टिलरी, निर्माण, स्टील ट्यूब, प्लास्टिक, ऑटो पार्ट्स, कैटल फीड और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विविध क्षेत्रों की कंपनियां शामिल हैं।
श्रेयस डिस्टिलरी एंड एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड 1879 करोड़ रुपये का निवेश कर करीब 500 लोगों को रोजगार देगी। वहीं गरुणा कंस्ट्रक्शन 1200 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित कर चुकी है, जिससे लगभग 5000 रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह परियोजना रोजगार सृजन के लिहाज से सबसे बड़ी मानी जा रही है। केयान डिस्टिलरी प्राइवेट लिमिटेड 800 करोड़ रुपये के निवेश से 100 लोगों को रोजगार उपलब्ध कराएगी।
केके एसेट प्लस प्राइवेट लिमिटेड 600 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित कर चुकी है, जिससे 20 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। इसी तरह एपीएल अपोलो ट्यूबस लिमिटेड 320 करोड़ रुपये के निवेश से 100 लोगों को रोजगार देगी। इसके अतिरिक्त आशीष इंफ्रा स्टेट (30 करोड़), पारस प्लास्टिक (25 करोड़), बाबा एक्वा सोल्यूशन (13 करोड़), एमएम आटोसेल्स प्राइवेट लिमिटेड (13 करोड़) और श्री बालाजी कैटल फीड्स (10 करोड़) भी अपने-अपने प्रोजेक्ट के जरिये स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में योगदान देंगी।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा सीधा लाभ
सहायक आयुक्त उद्योग रोशन आंबेडकर ने बताया कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से न केवल प्रत्यक्ष बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से भी हजारों लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। परिवहन, सप्लाई चेन, निर्माण कार्य, सुरक्षा, रखरखाव और अन्य सेवा क्षेत्रों में गतिविधियां बढ़ेंगी। इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही जिले में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी और अन्य शहरों की ओर पलायन में कमी आ सकती है।