रुपये दोगुना करने का लालच देकर करते थे ठगी
50 हजार लेकर थमा दी थी कागज की गड्डी, बिहार, झारखंड, यूपी, दिल्ली में भी किए हैं वारदात
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। कुशीनगर के रहने वाले पांच अनपढ़ाें का गिरोह, पढ़े लिखे लालची लोगों को फंसाकर ठगी करता है। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर पर्दाफाश किया है। पूछताछ में पता चला कि ये सभी रुपये को दोगुना करने का लालच देकर ठगी करते थे। सोशल मीडिया से दोस्ती करने के बाद बताते थे कि उनके पास विधायक का ब्लैकमनी है, अगर वह बड़े नोट देंगे तो दोगुना रकम का छोड़ा नोट दे दिया जाएगा। एम्स पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके पास से 42 हजार 295 रुपये, सात मोबाइल फोन, दो आधार कार्ड, पैन कार्ड बरामद किया है।
आरोपी इसके पहले बिहार, झारखंड, दिल्ली में भी वारदात कर जेल जा चुके हैं। वाराणसी, प्रयागराज में भी कुछ लोग इनके संपर्क में थे, जो रुपये दोगुना कराने के लालच में आ चुके थे। आरोपियों की पहचान कुशीनगर के पचरुखिया घाट निवासी सरगना सिराजुद्दीन अंसारी, नकटहा मिश्रा निवासी ताम्रध्वज उर्फ काजू राय, छावनी बाजार निवासी सनउवर उर्फ छोटू खान, बरदहा निवासी विनोद गुप्ता और अहिरौली बुजुुर्ग के राजकुमार के रूप में हुई। पुलिस ने सभी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेजा गया।
एसपी सिटी कृष्ण कुमार विश्नोई व सीओ कैंट अंशिका वर्मा ने बताया कि एम्स इलाके के रहने वाले मोहम्मद जैद के फेसबुक पर दो माह पहले सिराजुद्दीन ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजा था। जब वह घुल मिल गया, तब कहा कि वह ब्लैक मनी को खपाने का काम करता है। उसके पास एक विधायक का एक लाख रुपये छोटी नोट में है। अगर तुम 50 हजार दोगे तो तुम्हें तत्काल एक लाख मिलेंगे। जिसके बाद पीड़ित को एम्स के गेट पर 13 फरवरी को बुलाया गया।
जालसाजों ने उससे 500 की नोट में 50 हजार लेकर 200 की नोट का एक लाख दिया गया। उस एक लाख में पांच गड्डी में ऊपर व नीचे 200-200 का असली नोट था। बाकी कागज था। यानी पूरी गड्डी में केवल एक लाख की जगह दो हजार ही थे। पुलिस केस दर्ज कर जांच कर रही थी। सर्विलांस व सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि गिरोह कुशीनगर का है, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी की गई।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे फेसबुक पर फ्रेंड रिक्वेस्ट या दुकानों पर लगे बोर्ड से नंबर प्राप्त कर उन्हें फोन करते हैं और झांसे में लेकर दोगुना का लालच देकर नोट बदलने को कहते हैं फिर कागज की गद्दी थमाकर फरार हो जाते हैं। कोई मुकदमा दर्ज नहीं होने से न तो कभी पकड़े गए और न ही कोई इनका आपराधिक इतिहास है। जिले में भी इनकी यह पहली वारदात थी, जिसमें गिरफ्तारी हुई। ये गिरोह प्रयागराज, कानपुर व वाराणसी में भी पांच लाख व 10 लाख की ठगी का डील कर चुके थे, लेकिन सफल होने से पहले पकड़े गए। 15 साल से गिरोह इस तरह की घटनाओं को अंजाम दे रहा है।