गोरखपुर में महात्मा गांधी।(फाइल)
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राष्ट्रपिता महात्मा गांधी करीब 100 वर्ष पूर्व आठ फरवरी 1921 को गोरखपुर आए थे। उन्होंने बाले मियां के मैदान में जनसभा की थी। उन्हें सुनने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा था।
सुबह-सुबह गोरखपुर रेलवे स्टेशन ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज रहा था। घुटनों तक धोती पहने दुबला-पतला एक व्यक्ति समर्थकों के साथ स्टेशन से बाहर निकला और ऊंचे स्थान पर खड़ा होकर जनता का अभिवादन स्वीकार किया। सामने एक चादर बिछी थी, उस पर पैसों की बारिश हो रही थी।
यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि महात्मा गांधी थे।
गांधी जी का गोरखपुर में यह पहला और आखिरी आगमन था। उसी दिन उन्होंने बाले मियां मैदान पर जनता को संबोधित किया। वह दौर खिलाफत आंदोलन का था। लिहाजा सभा में उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता को बढ़ावा देने के अलावा अवध के किसानों को हिंसक आंदोलन नहीं करने की सलाह दी थी। गांधीजी उसी दिन शाम साढ़े आठ बजे की ट्रेन से बनारस चले गए। वापसी में भी रेलवे स्टेशनों व पटरियों के किनारे महात्मा के दर्शन के लिए लोग उमडे़ थे।
बाबा राघव दास की अगुवाई में मिला था प्रतिनिधिमंडल
17 अक्तूबर, 1920 को मौलवी मकसूद अहमद फैजाबादी और गौरीशंकर मिश्रा की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक सभा में महात्मा गांधी को गोरखपुर में आमंत्रित करने का निर्णय लिया गया था। टेलीग्राम के जरिये उनको बुलावा भेजा गया। इस बीच बाबा राघवदास की अगुवाई में एक प्रतिनिधिमंडल नागपुर के कांग्रेस अधिवेशन में गया और महात्मा गांधी से गोरखपुर आने का अनुरोध किया। उन्होंने जनवरी के अंत या फरवरी के शुरू में गोरखपुर आने का आमंत्रण स्वीकार किया था।