संवाद न्यूज एजेंसी
सिद्धार्थनगर। धान खरीद में हुए 16 करोड़ रुपये से अधिक के गबन की जांच की आंच में न सिर्फ विभागीय लोगों को झुलसाएगी। बल्कि गैर विभाग के लोग भी जांच की जद में आ रहे हैं। जांच का दायरा बढ़ने के साथ-साथ नए- नए तथ्य सामने आ रहे हैं।
पूर्व की तरह से बिना रकबा वाले किसानों के नाम से भी 50-100 क्विंटल धान की बिक्री किए हैं। अगर यह पुख्ता हुआ और बाहर आ गया तो सत्यापन में खेल करने वाले भी जद में आएंगे और उन्हें भी सलाखों का मुंह देखना पड़ सकता है।
बिना रकबे वाले किसानों से धान खरीद होने और बेचने का मामला जनपद के लिए नया नहीं है। डुमरियागंज में एक मामले में भूमिहीन किसानों से 1500 से 1700 क्विंटल धान खरीद करने मामला सामने आ चुका है। क्रय केंद्र पर तभी से ताला लटक रहा है।
एसआईटी गठित होने के बाद कार्रवाई तेज हो गई है। जांच के साथ ही गबन करने के मामले में पकड़े में आने वाले जेल जा रहे हैं। सदर पुलिस अबतक तीन को जेल भेज चुकी है। जबकि, बांसी से पहले से ही दो जेल जा चुके हैं।
धान खरीद में 16 करोड़ रुपये से अधिक के गबन का मामला सामने आया था। इसमें पीसीएफ के क्षेत्रीय प्रबंधक की तहरीर पर पीसीएफ के जिला प्रबंधक अमित चौधरी और चार अन्य केंद्र प्रभारियों पर सरकारी धन के गबन सहित अन्य धारा में मुकदमा दर्ज हुआ।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी बस्ती दिनेश कुमार पी ने सीओ सदर की अगुवाई में एसआईटी का गठन किया है। तीन इंस्पेक्टर, एक सीओ के लिए डिजिटल जानकारी के लिए अन्य तकनीकी के जानकारों सहयोग लिया जा रहा है। जिससे बैंक खातों के लेनदेन सहित अन्य जानकारी मिल सके।
एसआईटी ने अपना काम शुरू कर दिया है। टीम के जांच करने के साथ ही भ्रष्टाचार की परत दर परत सच्चाई निकलकर सामने आ रही है। अभी पहले चरण में संदिग्ध क्षेत्र में वाले पांच हजार किसानों को ट्रेस किया जा रहा है।
सूत्रों की मानें तो पूर्व की तरह से इसमें भी भूमिहीन किसानों की ओर से 50-100 क्विंटल की बिक्री करने की बात सामने आ रही है। अगर ऐसा हुआ है तो यह कहना गलत नहीं होगा कि गबन के इस खेल में पूरे सिस्टम के साथ अंजाम दिया गया है। क्योंकि पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है।
इसमें डिजिटल सत्यापन करने की व्यवस्था है, जिसमें अलग-अलग लोगों की जिम्मेदारी है। अगर मामला सत्यापन और रिपोर्ट पर आकर अटका तो बड़ी संख्या में लोग कार्रवाई की जद में आएंगे। हालांकि अभी इस मामले में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। क्योंकि एसआईटी डीआईजी की निगरानी में काम कर रही है। पूरे केस की मॉनीटरिंग उनके स्तर हो रहा है।