18 अप्रैल को जब नामांकन पत्रों की जांच हुई तो तारिक हसन को निर्दल उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। प्रशासन की तरफ से दलील दी गई कि शहाब अंसारी का पर्चा पहले दाखिल हुआ था लिहाजा उन्हें ही अधिकृत प्रत्याशी माना जाएगा। तारिक ने बाद में नामांकन किया था, इसलिए उन्हें निर्दल प्रत्याशी माना जाएगा।
आरोप है कि पार्टी की तरफ से प्रत्याशियों को सिंबल से जुड़ा फार्म ए,बी उपलब्ध कराने के लिए कुछ वरिष्ठ नेताओं को 10 से 14 फार्म दिए गए थे। पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम को भी निगम के आखिरी वार्डों के प्रत्याशियों को फार्म बांटने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वार्ड नंबर 80 से पार्टी प्रत्याशी नम्रता सिंह ने सिंबल मिलने के बाद भी नामांकन ही नहीं किया। वहां से भाजपा प्रत्याशी का निर्विरोध निर्वाचन तय है। तारिक का आरोप है कि जियाउल ने वार्ड नंबर 80 के प्रत्याशी का ही फार्म ए-बी, पूर्व महानगर अध्यक्ष शहाब अंसारी को उपलब्ध करा दिया, जिसे दाखिल कर वह पार्टी प्रत्याशी बन गए।
पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम ने कहा कि आरोप बेबुनियाद हैं। मुझे सिंबल से जुड़े 16 फार्म मिले थे। खुद के समेत मैने 12 उम्मीदवारों को यह फार्म उपलब्ध कराया और चार फार्म जिलाध्यक्ष को वापस लौटा दिया। वार्ड नंबर 80 के प्रत्याशी को जो सिंबल दिया गया है, वह उनके नाम से दिया गया। अब ऐसे में मैं, शहाब अंसारी को दूसरे का सिंबल कैसे उपलब्ध करा सकता हूं। इस तरह से पता करना है, तो यह पता किया जाए कि वार्ड नंबर 54, वार्ड नंबर पांच और वार्ड नंबर 69 से जिसे पार्टी प्रत्याशी घोषित किया गया, उन्होंने या तो नामांकन नहीं किया या फिर सिंबल का इस्तेमाल नहीं किया। ऐसे में ये सिंबल कहां गए। यदि इन्हीं में से किसी ने सिंबल इधर-उधर कर दिया हो, तो इसे भी बड़ा आधार मानने से कैसे इनकार किया जा सकता है।
शहाब अंसारी ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी तय करेंगे किसे टिकट मिला किसे नहीं। उन्होंने ने ही मुझे टिकट दिया। वो सवाल करेंगे तो जवाब दूंगा कि कहां से टिकट मिला। उनके अलावा नीचे कोई नहीं है जो, ये सवाल करे। और, मुझे यकीन है कि वह भी सवाल नहीं करेंगे क्योंकि टिकट तो उन्होंने ही दिया।
तारिक हसन ने कहा कि मेरे लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी ने खुद जिलाध्यक्ष के पास फोन किया था। तब 16 की शाम को पार्टी ने मुझे उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही सिंबल भी दिया । 17 को मैनें नामांकन किया लेकिन पूर्व महानगर अध्यक्ष जियाउल इस्लाम के करीबी होने की वजह से शहाब ने उनसे दूसरे का फार्म एबी हासिल कर लिया। नामांकन पत्रों की जांच के दौरान मुझे निर्दल बनाए जाने पर मैनें आरओ के सामने विरोध दर्ज कराया था। मगर, उनकी दलील थी कि शहाब ने भले ही फार्म एबी आखिरी दिन जमा किया लेकिन उन्होंने पर्चा पहले ही दाखिल कर दिया था। मैनें इसकी शिकायत जिलाध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष तक की है। उन्होंने मुझे उम्मीदवार बनाया है, इसलिए उनका सम्मान रखने के लिए मैं निर्दल ही चुनाव लड़ूंगा। मेरे पिता तौकीर हसन तीन बार पार्षद रह चुके हैं। जनता का मुझे पूरा समर्थन है।