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Gorakhpur News: आसान नहीं होगा संबद्ध कॉलेजों के लिए चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम

Sun, 16 Jun 2024 03:06 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों में इस सत्र से चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू होगा। विद्या परिषद से इसको मंजूरी मिल गई है और कार्य परिषद से मिलना बाकी है। लेकिन इस पाठ्यक्रम को संचालित करना संबद्ध कॉलेजों के लिए आसान नहीं होगा।
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प्रवेश कम होने की वजह से सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों की स्थिति पहले से ही खराब है। चार वर्षीय स्नातक ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री केवल विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को ही मिलेगी। कॉलेजों में रिसर्च सेंटर नहीं है ऐसे में वहां से यह डिग्री नहीं दी जा सकती है। विश्वविद्यालय से संबद्ध अधिकतर कॉलेजों में पीजी की पढ़ाई नहीं होती। ऐसे में उनको चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम संचालित करने में दिक्कत आ सकती है। हालांकि, विश्वविद्यालय शुरुआत में उनको मौका देगा कि वे अपने यहां सुविधाओं को सुधार लें ताकि उनको कोई समस्या न आए।
तीन तरह की डिग्री देना मनमानी

डीडीयू से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों के संगठन गुआक्टा के पूर्व अध्यक्ष प्रो. केडी तिवारी और पूर्व महामंत्री प्रो. धीरेंद्र सिंह ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर हमला बोलते हुए कहा है कि एक ही विश्वविद्यालय से स्नातक की तीन तरह की डिग्री दिया जाना शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए परेशानी खड़ी करेगा। नई व्यवस्था के अनुसार अब डीडीयू और कॉलेजों में चार वर्षीय पाठ्यक्रम लागू किया जा रहा है। जिन कॉलेजों में सिर्फ स्नातक तक की ही मान्यता है, उन कॉलेजों को चार वर्षीय स्नातक के लिए नए सिरे से आवेदन करने की व्यवस्था की गई है। यह आदेश समझ से परे है। उन्होंने कहा कि जिन कॉलेजों में पीजी की कक्षाएं चलती हैं, वहां ऑनर्स विद रिसर्च की सुविधा न देने का फैसला अनुचित है। इससे सभी मेधावी विद्यार्थी विश्वविद्यालय में पढ़ाई करने को विवश होंगे। सिर्फ डीडीयू में ही उच्चस्तरीय रिसर्च सेंटर है, कॉलेजों में नहीं है, यह दावा समझ से परे है। कॉलेजों के शिक्षकों के लिए रेट की परीक्षा पास करना अनिवार्य किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। चार वर्षीय पाठ्यक्रम को उन्हें समझाना मुश्किल है। इसको लेकर नियमों को भी अपडेट करने की जरूरत है। मापदंड में बदलाव हों ताकि कॉलेजों को इसको संचालित करने में कोई समस्या न आए।
डॉ. सुधीर कुमार राय
महामंत्री, स्ववित्तपोषित महाविद्यालय प्रबंधक महासभा


विश्वविद्यालय सहित सभी कॉलेजों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम ही संचालित होगा। जहां पर पीजी की पढ़ाई नहीं होती वहां भी इसकी शुरुआत होगी। ऑनर्स विद रिसर्च डिग्री केवल विश्वविद्यालय परिसर में मिलेगी। जिन काॅलेजों में पीजी की व्यवस्था नहीं है उनके पास तीन वर्ष का समय रहेगा। यदि वे इसमें सुविधाओं को अपडेट कर लेते हैं तो वहां चार वर्ष की ऑनर्स डिग्री दी जाएगी। नहीं तो वहां के विद्यार्थियों के पास एग्जिट का विकल्प मौजूद रहेगा। जल्द ही कॉलेजों के प्राचार्याें संग बैठक कर इसके संचालन पर विचार किया जाएगा और गाइडलाइन जारी की जाएगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
तीन तरह की डिग्री के विरोध में आया गुआक्टा
गुआक्टा के अध्यक्ष प्रो. लोकेश त्रिपाठी और महामंत्री डॉ. निरंकार राम त्रिपाठी ने चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम में तीन तरह की डिग्री और अन्य कई समस्याओं को लेकर कुलपति को ज्ञापन सौंपा। कहा कि 13 जून को संपन्न विद्या परिषद की बैठक में विश्वविद्यालय के तीन तरह के डिग्री देने की बात ने सबको चौंका दिया। नयी व्यस्थापन के अनुसार विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम लागू हो गया है, लेकिन जिन महाविद्यालयों में केवल स्नातक तक अधिक कक्षायें चलती हैं उन महाविद्यालयों को चार वर्षीय स्नातक कोर्स चलाने के लिए संबद्धता हेतु नए सिरे से आवेदन की बात कह दी गई है। जिन महाविद्यालयों में परास्नातक स्तर तक की कक्षायें चलती हैं, वहां चार वर्षीय कोर्स चलाने के संबद्धता हेतु नये सिरे से आवेदन तो नहीं करना होगा, लेकिन वहां से उत्तीर्ण होने वाले परीक्षार्थियों को बीए ऑनर्स की डिग्री मिलेगी जबकि दूसरी ओर केवल विश्वविद्यालय केंद्र से उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों को ऑनर्स विद रिसर्च की उपाधि मिलेगी। इसका खामियाजा आगे महाविद्यालयों को भुगतना पड़ेगा और अधिकांश विद्यार्थी प्रवेश हेतु विश्वविद्यालय का रुख कर लेंगे।

इस नयी व्यवस्था से महाविद्यालयों का प्रवेश प्रभावित होगा। उन्होंने कहा कि दो वर्ष बाद होने जा रहे रेट की परीक्षा में सम्बद्ध अनुदानित महाविद्यालय के शिक्षकों को भी प्रवेश परीक्षा देने के लिए बाध्य करना किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं है। कहा कि अगर महाविद्यालय में रिसर्च सेंटर नहीं होगा तो विश्वविद्यालय की भांति महाविद्यालयों को नैक, ग्रेडिंग, स्टेटस, आदि कराने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा और इससे और भी उत्तरोत्तर समस्याएं अथवा विसंगतियां उत्पन्न होंगी। गुआक्टा ने शिक्षकों के मूल्यांकन के पारश्रमिक के भुगतान और विभिन्न अकादमिक समितियों में प्रतिनिधित्व की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने विश्वविद्यालय में स्थायी कुलसचिव की भी मांग की।
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