अधिकारियों ने लिखा-पढ़ी में इसे नष्ट करने का दावा किया, लेकिन जिस पिकअप पर लदे टमाटर को कस्टम ने नष्ट करने का दावा किया था, उसी पिकअप को अगले दिन पुलिस ने टमाटर की कालाबाजारी के आरोप में पकड़ लिया और दोबारा कस्टम विभाग को सौंप दिया था।
कर्मचारी पहले तो मामले को दबाने में लगे रहे, लेकिन जब पुलिस, एसएसबी और कस्टम के उच्चाधिकारियों को इसकी भनक लगी तो जांच बैठा दी गई। मामला संज्ञान में आने पर दोषी सभी छह कर्मचारियों को लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया। सूत्र बताते हैं कि प्रारंभिक जांच में ही हेराफेरी सामने आ गई। जांच में पाया गया कि टमाटर लदी जिस गाड़ी को जब्त किया गया था, उसे छोड़ दिया गया। जबकि कस्टम विभाग के रिकाॅर्ड में टमाटर को नष्ट करने और गाड़ी को सीज दिखाया गया। प्रारंभिक जांच के आधार पर ही चार कस्टम अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।अन्य की विभागीय जांच की जा रही है।
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निलंबन की कार्रवाई छह माह से लेकर पांच वर्ष तक हो सकती है। अगर जांच में जिम्मेदार पद पर इन्हें दोबारा नियुक्त किए जाने पर संशय हुआ तो इनके निलंबन को बोर्ड में भेजा जाता है। वहां अपराध की समीक्षा कर अधिकारियों की ओर से आगे की सजा सुनाई जाती है। नियम है कि दोषी पाए जाने पर बोर्ड पांच वर्ष तक के लिए निलंबित कर सकता है।
कस्टम विभाग एडिश्नल कमिश्नर गौरव चंदेल ने कहा कि टमाटर की तस्करी मामले में महाराजगंज कस्टम विभाग के दोषी चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। आगे की जांच चल रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।