बस्ती जिले के भैरोपुर थाना कलवारी निवासी मो. आसिफ का आरोप है कि उसके नौ माह के बेटे की तबीयत 19 अगस्त को खराब हुई। उसे दस्त हो रहा था, जिसके कारण वह अनमना सा था। वह सुबह बच्चे को लेकर यहां आए तो बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. वीपी यादव से मिले और दो तीन दवाइयां लिख कर उन्होंने घर जाने को कहा। बाद में बच्चे की देखकर चिकित्सक ने भर्ती करने को कहा। पिता के अनुसार, वह भर्ती करने पहुंचे, तो वहां मौजूद चार नर्स चाय पी रहीं थीं।
मैंने कहा कि बच्चे को भर्ती कराकर ग्लूकोज आदि चढ़ाना है। नर्सों ने भी वार्ड में चलने को कह पीछा छुड़ा लिया। आधे घंटे में भी जब वह नहीं आईं तो दोबारा उनके पास पहुंचा और चिकित्सक से उनकी बात कराई। इस पर नर्स खासी नाराज हुईं और बच्चे को इंजेक्शन व ग्लूकोज तो लगा दी, मगर उनका रवैया बेहद डरावना था।
इसके बाद बच्चा चीखने लगा, तो फिर से उनसे स्थिति बताई, मगर उन लोगों ने स्पष्ट कर दिया कि अभी बच्चा चुप हो जाएगा। थोड़ी देर बाद वास्तव में बच्चा चुप हो गया, मगर उसके सांसों की डोर थम गई थी।
आसिफ के अनुसार, उसे अंदेशा है कि नर्सों ने बच्चे को ओवरडोज इंजेक्शन दिया है। मौत के बाद आसिफ ने स्वास्थ्य प्रशासन के आला अफसरों के अलावा सीडीओ, एसडीएम, एसपी व एएसपी तक को घटना की सूचना दी। मौके पर पुलिस भी पहुंच गई।
आरोप है कि दोपहर से लेकर शाम तक मृतक का पोस्टमार्टम भी नहीं कराया। ऐसे में यह मामला संदिग्ध है। इस मामले में प्रभारी एसआईसी डॉ. राम प्रकाश ने कहा कि मामला संज्ञान में है। इसकी जांच के लिए एसआईसी डॉ. आलोक वर्मा ने चार सदस्यीय टीम गठित की है। दोषी बचने नहीं पाएंगे।