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Gorakhpur News: सूर्य के प्रकाश को ईंधन में बदलने की सस्ती तकनीक विकसित करेगा डीडीयू

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गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के के रसायन विज्ञान विभाग के चार असिस्टेंट प्रोफेसर्स को उत्तर प्रदेश उच्च शिक्षा विभाग की ओर से शोध एवं विकास कार्यों के लिए लगभग 10 लाख का अनुदान मिला है। डॉ. आलोक कुमार सिंह बढ़ती पर्यावरणीय समस्या के बीच सस्ती और टिकाऊ तकनीक विकसित करने के लिए शोध करेंगे। इसके तहत सीमित मेटल कॉम्पलेक्सेस का उपयोग करके सूर्य के प्रकाश से सीओ2 को तकनीकी ईंधन में बदलने की दिशा में काम करेंगे।
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औद्योगिक क्षेत्रों में इसके उपयोग से प्रदूषण घटेगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इसी तरह डॉ. इन्द्रेश पांडेय की शोध परियोजना को विद्युत रासायनिक विधि द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड (सीओ2) को मूल्यवान उत्पादों या ईंधन में परिवर्तित करने के उद्देश्य से स्वीकृत किया गया है।

डॉ. गीता सिंह गोरखपुर क्षेत्र में उपलब्ध खाद्य पदार्थों में नियोनिकोटिनोइड वर्ग के कीटनाशकों के अवशेषों का सूक्ष्म स्तर पर विश्लेषण करेंगी। इस अध्ययन का उद्देश्य इन रसायनों के दुष्प्रभावों का आकलन करना व जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए वैज्ञानिक आधार पर सुझाव प्रस्तुत करना है। शोध कार्य में उनकी सह प्रधान अन्वेषक प्रो. सुधा यादव हैं I डॉ. प्रदीप कुमार राव ऑक्सीजनयुक्त वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों के संगणक पर अध्ययन करेंगे। इस शोध का उद्देश्य वायु गुणवत्ता और पर्यावरण पर इनके प्रभाव का विश्लेषण करना है। परियोजना में उन्नत कंप्यूटेशनल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
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इस उपलब्धि पर कुलपति प्रो. पूनम टंडन, प्रति कुलपति प्रो. शांतनु रस्तोगी, रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. उमेश नाथ त्रिपाठी एवं सभी शिक्षकों ने बधाई दी है।
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