2015 में नगर निगम के कर्मचारी नेताओं को धमकी देने का मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। नगर निगम के पूर्व उपसभापति और पार्षद ऋषि मोहन वर्मा को एजीएम कोर्ट से नौ साल पुराने मामले में जमानत मिल गई। 2015 में नगर निगम में धरना दे रहे कर्मचारी नेताओं को धमकी व गाली देने के प्रकरण में पूर्व उपसभापति एवं दिग्विजय नगर वार्ड के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने एसीजेएम कोर्ट नंबर दो के समक्ष हाजिर होकर जमानत कराई और जारी वारंट को निरस्त कराया।
बता दें कि 2015 में नगर निगम के सदन की बैठक में मुख्य अभियंता एसके केसरी के साथ कुछ पार्षदों ने दुर्व्यवहार किया था। जिसके विरोध में कर्मचारी संघ के नेताओं ने नगर निगम कार्यालय में 30 सितंबर 2015 को कार्य बहिष्कार कर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया था। इस दौरान कर्मचारी नेता राम प्रकाश सिंह व मो.आरिफ सिद्दीकी समेत अन्य का आरोप था कि पूर्व पार्षद चंद्रशेखर सिंह, तत्कालीन पार्षद जनार्दन चौधरी व पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने अन्य पार्षदों और अराजकतत्वों के साथ मिलकर धरना-प्रदर्शन स्थल पर आकर धमकी व गाली देकर उन्हें भाग जाने को कहा था।
मामले में कोतवाली थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने आरोप पत्र एसीजेएम कोर्ट दो में प्रेषित किया था। न्यायालय की कार्रवाई के दौरान पूर्व उपसभापति ऋषि मोहन वर्मा के अधिवक्ता नीरज शाही ने पक्ष रखते हुए अदालत के समक्ष पेशी कराकर वारंट निरस्त कराते हुए जमानत कराई।