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Gorakhpur News: एम्स में मेडिकल टूरिज्म के जरिए विदेशियों को भी मिलेगा बेहतर उपचार

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एम्स गोरखपुर में शासी निकाय और शैक्षिक निकाय की बैठक में लिया गया निर्णय
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300 बेड का ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर और पब्लिक हेल्थ एजुकेशन कोर्स की भी होगी शुरुआत
मरीजों की सुविधा के लिए बनाया जाएगा 500 बेड का डे-नाइट शेल्टर होम

अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर आने वाले वर्षों में देश ही नहीं, विदेश में रहने वालों को भी बेहतर चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराएगा। इसके लिए मेडिकल टूरिज्म के तौर पर एक नया प्रयोग होने जा रहा है। इसके तहत एम्स में मौजूद स्वास्थ्य सेवाएं विदेश से भारत या यूपी घूमने आए लोगों को अलग से उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्हें ऐलोपैथ, होम्योपैथ व आयुर्वेद के अलावा योगा युक्त फिजिकल मेडिकल रिहैबिलिटेशन सेंटर भी मिलेगा। इसके लिए उन्हें शुल्क देना होगा।
हालांकि यह सेवा विश्व के अन्य देशों की अपेक्षा 25 फीसदी सस्ती होगी। ऐसी सुविधा अभी पूरे देश में कहीं नहीं है। इसके अलावा यहां 300 बेड का एडवांस्ड ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर सेंटर बनाया जाएगा। पब्लिक हेल्थ एजुकेशन सेंटर में मलेरिया, फाइलेरिया, डेंगू, इंसेफेलाइटिस जैसी बीमारियों के इलाज व शोध व रोकने के उपायों के साथ-साथ पढ़ाई भी होगी।
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ये सारे निर्णय लिए गए बुधवार को एम्स गोरखपुर के शासी निकाय और शैक्षिक निकाय की बैठक में। इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता एम्स गोरखपुर के अध्यक्ष देश दीपक वर्मा ने की। बैठक में संस्थान की हालिया उपलब्धियों की समीक्षा के बाद क्षेत्र की जरूरत को ध्यान में रखते हुए नई स्वास्थ्य सुविधाओं पर जोर दिया गया।
बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए एम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल व अध्यक्ष देशदीपक वर्मा ने संयुक्त रूप से बताया कि पहली बार मेडिकल टूरिज्म शुरू करने का निर्णय लिया गया है। इस पहल का उद्देश्य संस्थान को एक अग्रणी स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जो इस क्षेत्र के अलावा दुनिया के अन्य देशों से आने वालों को भी स्वास्थ्य सेवा दे सके।
कार्यकारी निदेशक ने बताया कि इससे एम्स गोरखपुर की वैश्विक पहचान बनने के साथ-साथ सुविधाओं में भी विकास होगा। इसके अलावा सार्वजनिक स्वास्थ्य शिक्षा और अनुसंधान के महत्व को समझते हुए, एम्स में पब्लिक हेल्थ स्कूल की स्थापना को मंजूरी दी है। यह नई शैक्षणिक इकाई भविष्य के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित करेगी। साथ ही इससे शोध को भी बढ़ावा मिलेगा।

300 बेड का होगा एडवांस्ड ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर सेंटर
पूर्वांचल में अभी अति गंभीर रोगियों के तत्काल बेहतर इलाज के लिए उच्च सुविधा युक्त ट्रॉमा और क्रिटिकल केयर सेंटर नहीं है। इसे देखते हुए एक विश्व स्तरीय ट्रामा एंड क्रिटिकल केयर यूनिट की स्थापना का निर्णय लिया गया है। इस केंद्र में बर्निंग केस के लिए भी 50 बेड आरक्षित होंगे। यह मल्टी स्पेशलिटी सुविधा होगी। पहले चरण में 250 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। दूसरे चरण में भी 250 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 300 बेड वाले इस ट्रामा सेंटर में मरीज की जांच व इलाज से संबंधित सारे उपकरण व डॉक्टर एक छत के नीचे मिलेंगे। इसके लिए परिसर में ही अलग से नया भवन बनाया जाएगा। भवन के लिए जमीन भी चिह्नित कर ली गई है। पूर्वी यूपी और पश्चिमी बिहार में ऐसी सुविधा वाला यह पहला ट्रामा सेंटर होगा।
सुपर स्पेशियलिटी विभागों का विस्तार
बैठक में सुपर स्पेशियलिटी विभागों की नियुक्ति प्रक्रिया पर चर्चा की गई। कार्यकारी निदेशक ने बताया कि दो नए संकाय सदस्य कार्डियोलॉजी विभाग, एक गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग और एक न्यूरोलॉजी विभाग में शामिल हुए हैं। नर्सिंग अधिकारियों सहित 924 गैर-संकाय कर्मचारियों की भर्ती भी पूरी हो गई है। संस्थान ने हाल ही में कॉर्निया प्रत्यारोपण सर्जरी के लिए बीआरडी मेडिकल कॉलेज के साथ समझौता किया है। ड्रोन परियोजना और पीत ज्वर टीकाकरण का भी एम्स केंद्र है। इसके अलावा संस्थान के उपकरणों की निगरानी के लिए इंजीनियरिंग विभाग की स्थापना पर भी चर्चा की गई।
500 बेड का बनेगा शेल्टर होम
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर पाॅवर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने एम्स गोरखपुर में 500 बिस्तरों वाले रात्रि आश्रय (विश्राम सदन) के निर्माण के लिए सीएसआर फंड से 47.8 करोड़ रुपये देने पर सहमति दी है। यह आश्रय रोगियों और उनके परिचारकों के लिए किफायती आवास प्रदान करेगा, जिससे रोगी सहायता सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
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ये लोग रहे बैठक में मौजूद
बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य सेवा महानिदेशक डॉ. अतुल गोयल, अतिरिक्त सचिव और वित्तीय सलाहकार, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय जयदीप कुमार मिश्रा, प्रो. प्रेमेंदु पी. माथुर, कुलपति, बिरला ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर, ओडिशा, प्रो. (डॉ.) विनय कुमार तिवारी, डीन, नॉर्थ डीएमसी मेडिकल कॉलेज और हिंदू राव अस्पताल, मलका गंज, दिल्ली, डॉ. आरती लालचंदानी, पूर्व प्रिंसिपल और डीन, गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज, कानपुर, प्रो. (डॉ.) रामेश्वर नाथ चौरसिया, प्रोफेसर न्यूरोलॉजी चिकित्सा विज्ञान संस्थान, बीएचयू, वाराणसी, प्रो. (डॉ.) राणा अनिल कुमार, कंसल्टेंट सर्जन, प्रोफेसर और प्रमुख, राम मनोहर लोहिया अस्पताल, नई दिल्ली, डॉ. महिमा मित्तल, डीन (अकादमिक), एम्स गोरखपुर ने भी अपने विचार रखे।

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