ये दो केस तो महज बानगी हैं। गोरखपुर मंडल में 76 ऐसे मेडिकल स्टोर हैं, जो फर्जी अभिलेखों के जरिए चल रहे हैं। इनके रजिस्ट्रेशन में जमकर खेल हुआ है। फर्जी फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर सभी लाइसेंस जारी किए गए है। बताया जाता है कि फार्मासिस्ट रजिस्ट्रेशन नंबर पर फर्जी तरीके से नाम, पता और फोटो बदलकर लाइसेंस जारी कर दिया गया है। जबकि वास्तविक फार्मासिस्ट का नाम, पता और फोटो बिल्कुल अलग है। खास बात यह है कि सभी मेडिकल स्टोरों का रजिस्ट्रेशन करीब तीन साल पहले ही कराया गया है। उस वक्त ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था नहीं थी। इसकी वजह से आसानी से विभागीय सांठगांठ कर लोगों ने रजिस्ट्रेशन करा लिए।
फर्जी दस्तावेज लगाकर हुआ खेल
रजिस्ट्रेशन में खेल फर्जी दस्तावेज के जरिए खेला गया। फार्मासिस्ट के रजिस्ट्रेशन नंबर पर फर्जी तरीके से नाम, पता, फोटो बदलकर फर्जी लाइसेंस जारी किए गए। जबकि वास्तविक फार्मासिस्ट का नाम और पता अलग है। लेकिन विभागीय मिलीभगत से मामले की जांच नहीं हो सकी।