गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए गोरखपुर मंडल के तीन जिलों के 115 गांवों की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) डीपीआर तैयार करने में जुटा है। पहले 111 गांवों की जमीन अधिग्रहित होनी थी, लेकिन बीच में ग्रीन लैंड एरिया पड़ने के चलते एक्सप्रेस-वे को घुमाया जा रहा है।
इससे चार और गांवों की भूमि भी इसकी जद में आएगी। इससे एक्सप्रेस-वे की लंबाई भी 3-4 किमी और बढ़ जाएगी।
गोरखपुर-कुशीनगर फोरलेन पर कोनी के पास से गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे शुरू होगा। यह सड़क फोरलेन बनाई जाएगी, लेकिन सिक्सलेन के हिसाब से 75 मीटर चौड़ाई में भूमि अधिग्रहित की जाएगी, ताकि भविष्य में इसे चौड़ी करनी पड़े तो दिक्कत न हो।
भारत माला परियोजना के तहत गोरखपुर से सिलीगुड़ी तक एक्सप्रेस-वे के निर्माण पर करीब 32000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका उत्तर प्रदेश में 84.3 किमी, बिहार में 416.2 किमी और पश्चिम बंगाल में 18.97 किमी हिस्सा पड़ेगा। सड़क की कुल लंबाई 519.58 किमी होगी।
कुशीनगर-देवरिया में हरित क्षेत्र के चलते बदली डीपीआर
एनएचएआई ने इसका प्रस्ताव वर्ष 2021 में देते हुए सर्वे की जिम्मेदारी भी एक फर्म को दे दी थी, लेकिन इस मार्ग पर हरित क्षेत्र होने के चलते वन विभाग की अड़चन से बचने के लिए दोबारा डीपीआर तैयार करने की योजना बनाई गई। इसके चलते एक्सप्रेस-वे देवरिया और कुशीनगर के कुछ हिस्सों में घूमकर जा रहा है। इसके चलते पहले यूपी में इसकी लंबाई करीब 81 किमी थी। अब बढ़कर करीब 85 किमी हो जाएगी।
इन जिलों के गांव की जमीन होगी अधिग्रहित
गोरखपुर के चौरीचौरा तहसील के 14
कुशीनगर के हाटा तहसील के 22
कुशीनगर के कसया तहसील के 14
कुशीनगर के तमकुहीराज के 45
देवरिया के सदर तहसील के 22
एनएचएआई के परियोजना निदेशक ललित प्रताप पाल ने बताया कि गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे की डीपीआर तैयार कराई जा रही है। बारिश के चलते काम में तेजी नहीं आ पा रही है। इस मार्ग में हरित क्षेत्र का कुछ हिस्सा पड़ने के चलते एक्सप्रेस-वे की लंबाई बढ़ रही है। जल्द डीपीआर का काम पूरा कर इसे शासन को भेज दिया जाएगा।