प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जिले के 45 हजार से अधिक किसान वंचित हो गए हैं। ये वे किसान हैं, जिनके बैंक खाते में किसी न किसी प्रकार की गड़बड़ी है। जिसकी वजह से धनराशि नहीं जा सकी है। इसमें कहीं न कहीं विभाग की ओर से बड़ी लापरवाही हुई है। कारण लगभग तीन माह इसी के लिए अभियान चलाया गया था। इसका उद्देश्य था कि गांव-गांव में कृषि, राजस्व और ग्राम पंचायत स्तर के अधिकारी चौपाल लगाकर कागजात लेकर खातों को सही करवाएं। मृतक व अन्य अपात्रों को बाहर करें और नये पात्र लोगों को जोड़ें। इसके बाद भी बड़ी संख्या में किसान वंचित हो गए। आगे की राशि न रुके इसके लिए किसानों को खुद बैंक खाते से जुड़ी खामियों को दूर कराना होगा। इसके लिए उन्हें दौड़भाग के साथ ही जेब ढीली करनी होगी।
केंद्र की मोदी सरकार किसानों की आय को दोगुना बनाने के लिए कई कदम उठा रही है। जिससे किसान तरक्की कर सकें और खेती के प्रति उनका झुकाव बढ़े। वहीं, किसानों को उचित सम्मान मिले इसलिए सरकार ने वर्ष 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत हर जोत वाले किसान को सम्मान निधि दिया जाना था। शासन से निर्देश हुआ और आनन-फानन किसानों का पंजीकरण करके रिपोर्ट दी गई। इसमें तमाम ऐसे लोग चयनित हो गए कि जो आयकर दाता, मृत थे। इस बीच केंद्र सरकार ने वास्तविक किसान को ही किसान सम्मान निधि का लाभ मिले, इसके लिए विशेष सत्यापन अभियान का निर्देश दिया। जिसमें तीन सदस्य टीम को हर लाभार्थी के घर-घर और गांव में बैठक बुलाकर के किसानों के समक्ष खड़े होकर एक-एक किसान का सत्यापन करना था। सत्यापन कार्य में लेखपाल, ग्राम पंचायत सचिव और ब्लॉक स्तरीय कृषि विभाग कर्मी को जिम्मेदारी दी गई थी।
आंकड़ों के मुताबिक 350273 किसान पंजीकृत हैं। लेकिन चुनाव बाद जब 17वीं किश्त अभी 18 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के खाते में भेजा है। उसमें 281952 किसानों को ही सम्मान निधि मिली है। जबकि, 70 हजार के लगभग किसान सम्मान निधि नहीं पाए हैं। लेकिन इसमें 45 हजार के लगभग ऐसे किसान हैं, जिनका ई-केवाईसी, भूलेखा एवं आधार सीडिंग नहीं होना पाया गया है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि जब टीम घर-घर गई थी। पूरे तीन तक सत्यापन चला तो खातों में कमी कैसे रह गई। यानी कार्य में कहीं न कहीं शिथिलता बरती है। अब किसानों को उसे सही कराने के लिए जूझना पड़ेगा। 70 में बाकी बचे 25 हजार किसान के खाते सही हैं, लेकिन किश्त आगे पीछे होने के कारण उनके खाते में नहीं पहुंची।
टीम को एक साथ जाने का था निर्देश
शासन की मंशा थी त्रिस्तरीय टीम में लेखपाल को राजस्व की जानकारी रहेगी। जबकि ग्राम पंचायत सचिव को गांव के व्यक्ति के बारे में जानकारी रहेगी और कृषि विभाग डाटा से मिलान करेगा। इसलिए त्रिस्तरीय कमेटी गठित की गई थी और निर्देश था कि एक साथ जाकर गांव में चौपाल लगाएंगे। बैठक करके सभी लाभार्थी किसानों को बुलाएंगे। वहां पर मृतक किसान कौन है, कौन भूमिहीन है या फिर किसके नाम से कई स्थानों पर खेत है। यहां के बजाय दूसरे गांव में दर्ज है, यह सब जानकारी लेंगे। इसके आधार पर पात्र और अपात्र घोषित करेंगे। साथ ही नये पात्रों को जोड़ने के साथ ही बैंक खातों को सही करवाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। सूत्रों की माने तो लेखपाल ग्राम पंचायत सचिव और कृषि विभाग के कर्मी एक साथ कभी गांव में पहुंचे ही नहीं। शुरुआत में तो जांच सही चली, लेकिन बाद में कोरम पूर्ति हुआ। दूसरा पहलु यह भी ही किसान खुद आगे बढ़कर रुचि नहीं लिए।
दो वर्ष से करीब हमारे खाते में किसान सम्मन निधि का पैसा नहीं आ रहा है। पूर्व में किसान सम्मन निधि का पैसा दो से तीन किस्त हमारे खाते में आ चुका था। केवाईसी वीएन अभिलेख कई बार अपडेट करने के बाद भी अबतक किसान सम्मन निधि नहीं मिला है। बैंक पर गए तो कुछ नहीं बताए।
-सालिकराम, किसान, वार्ड नंबर 9 सुभाष नगर, डुमरियागंज
करीब एक साल से रजिस्ट्रेशन कराया है। लेकिन अबतक नहीं आया किसान सम्मान निधि कृषि विभाग का चक्कर बेनीनगर से लेकर जिले तक लगा रहा हूं। कोई स्पष्ट नहीं बता रहा कि क्या कमी है। गांव में कब चौपाल लगा पता नहीं चला। सब कागज में सर्वे और काम होता है।
-दीपक श्रीवास्तव,
किसान, निवासी रमवापुर उर्फ नेबुआ
अब किसानों को जांच करवाना होगा खाता
किसानों के खातों से ई-केवाईसी, भूलेखा एवं आधार सीडिंग नहीं होना पाया गया है। अब किसान भूलेख एवं आधार सीडिंग तहसील स्तर पर और संबंधित बैंक में जाकर आधार ई-केवाईसी करवा सकते हैं। अगर दिक्कत हो तो कृषि विभाग पर संपर्क कर सकते हैं।
किसानों के खाते से आधार, भूलेखा और ई-केवाईसी न होने के कारण सम्मान निधि नहीं जा सकी है। किसान समय रहते इसे सही करवा लें, जिससे आगे नियमित धनराशि खाते में जाता रहेगा।
-आरके विश्वकर्मा, उपकृषि निदेशक