एसपी सिटी का कहना है कि डिजिटल वॉलेट और ब्लॉक चेन ट्रांजेक्शन ट्रेस किए जा रहे हैं। बरामद चैट में डॉलर में हुए ट्रांजेक्शन के सबूत भी मिले हैं। जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोहों से जुड़ा है जो भारत के भीतर से विदेशी नियंत्रण में साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं।
साइबर जालसाजी की रकम को म्यूल खातों से क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेजने वाले गिरोह की जांच में एक और पर्दाफाश हुआ है। पता चला है कि गिरोह के गुर्गे एनजीओ और व्यवसायिक खातों का जाल बिछाकर साइबर फ्रॉड की रकम को पहले नकद और फिर क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश स्थित नियंत्रकों तक पहुंचाते थे।
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पुलिस अब उनके खातों की डिटेल खंगाल रही है ताकि पता चल सके कि उनके खातों में कब और कितने रुपये आए। साइबर ठगी की रकम को म्यूल खातों से क्रिप्टो करेंसी में बदल कर विदेश भेजने वाले गिरोह के पांच गुर्गों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया था।
साइबर ठग
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से प्राथमिक पूछताछ में पर्दाफाश हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड कैंट निवासी शैलेश चौधरी अपने साथियों के नाम पर म्यूल बैंक खाता खुलवाता था।
इन खातों में साइबर ठगी से आई रकम ट्रांसफर कर बैंक, एटीएम के जरिये नकद निकाल ली जाती थी। इसके बाद राशि को अपने साथियों की मदद से क्रिप्टो करेंसी में कन्वर्ट कराया जाता था। बदले में वह 5–10 प्रतिशत कमीशन लेता था।
साइबर अपराधी।
- फोटो : amar ujala
उन्होंने बताया कि इसी गिरोह का दूसरा अहम गुर्गा गोरखनाथ इलाके के जमुनियाबाग निवासी आदिल शफीक ने कई एनजीओ के नाम पर करेंट अकाउंट खुलवाए थे। इन खातों में भी ठगी की रकम आती थी जिसे कैश में बदलकर सीधे गैंग को सौंपा जाता था।
जबकि अनुज साहू ने अपने मछली व्यापार के नाम पर करेंट अकाउंट खुलवाकर ठगी की रकम को कैश आउट करने में इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, गैंग पूरी तरह संगठित तरीके से काम करता था जो फर्जी खातों, यूपीआई और हवाला चैनलों के जरिये करोड़ों की धनराशि को ट्रांसफर कर रहा था।
साइबर ठग
- फोटो : social media
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह के एक अन्य गुर्गे कुशीनगर निवासी शुभम राय और कोतवाली के बक्शीपुर निवासी विशाल गुप्ता, शैलेश से प्राप्त नकद को अपने डिजिटल संपर्कों के माध्यम से क्रिप्टो करेंसी में बदलवाते थे।
इसके बाद हवाला नेटवर्क के जरिये यह राशि विदेश भेजी जाती थी। पुलिस अब जेल भेजे गए आरोपियों के बैंक खातों की डिटेल निकलवा रही है ताकि पता चल सके कि उनके खाते में रुपये कब और कितने आए, कब ट्रांसफर किए गए।
साइबर अपराधी लोगों को कर रहे डिजिटल अरेस्ट,
- फोटो : social media
70.54 लाख की वित्तीय गतिविधि ट्रेस, 9.60 लाख फ्रीज
अब तक की विवेचना में पुलिस को 70.54 लाख से अधिक की संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों का पता चला है। इनमें से 9.60 लाख रुपये विभिन्न खातों में फ्रीज किए गए हैं। पुलिस ने बरामद दस्तावेजों और चैट्स में विदेशी व्हाट्सएप नंबर, चार डिजिटल वॉलेट एड्रेस और टीम ऑर टूटर्स जैसे बैंक खातों का उपयोग पाया है।
एसपी सिटी अभिनव त्यागी का कहना है कि गिरोह कैश को क्रिप्टो फिर हवाला के जरिये विदेश मॉडल पर काम करता था। फर्जी बैंक खातों में आने वाली रकम को नकद में बदलकर डिजिटल करेंसी के रूप में ट्रांसफर किया जाता था और बाद में हवाला नेटवर्क के जरिये यह धन विदेश भेजा जाता था।
गिरफ्तार पांचों आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस के निशाने पर अब विदेशी कनेक्शन पुलिस ने गिरोह के विदेशी संपर्कों की पहचान शुरू कर दी है। एसपी सिटी का कहना है कि डिजिटल वॉलेट और ब्लॉक चेन ट्रांजेक्शन ट्रेस किए जा रहे हैं। बरामद चैट में डॉलर में हुए ट्रांजेक्शन के सबूत भी मिले हैं।
जांच एजेंसियों को आशंका है कि यह नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय ठग गिरोहों से जुड़ा है जो भारत के भीतर से विदेशी नियंत्रण में साइबर अपराध को अंजाम दे रहे हैं। प्राथमिक जांच में पता च ला कि गैंग का मास्टरमाइंड चीन के एक हैकर के संपर्क में था। उससे वह अक्सर व्हाट्सएप कॉल पर बातचीत करता था।
जेल भेजे गए शुभम की 25 नवंबर को थी शादी
एसपी सिटी ने बताया कि पुलिस ने जब शुभम राय को गिरफ्तार किया तो वह रोने लगा था। वह पुलिसकर्मियों से बोला-मैं दोस्तों के बहकावे में आकर फंस गया। उसकी 25 नवंबर को शादी है। घर में शादी की तैयारियां चल रही हैं। प्लीज मुझे छोड़ दीजिए। इधर, बेटे की गिरफ्तारी के बाद परिजन भी मीडिया कर्मियों से दूरियां बनाए रहे। कुछ भी बोलने से इन्कार कर दिया।
जो देश का नहीं हुआ वह मेरा क्या होगा
गैंग का मास्टरमाइंड रिटायर्ड सैन्यकर्मी विनोद चौधरी का बेटा है। बेटे की करतूत जब पिता को हुई तो उन्होंने पुलिसकर्मियों से कहा कि ये मेरा बेटा नहीं हो सकता। इसे ले जाइए गोली मार दीजिए। इससे मेरा कोई संबंध नहीं है। जो देश का नहीं हुआ वह मेरा क्या होगा।