ऐसे में प्रावधान के अनुसार प्रथम एवं द्वितीय अपीलीय अधिकारियों को निर्धारित अवधि में हर हाल में आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना के संबंध में जवाब दे देनी चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं करता है तो उसके खिलाफ दंड का प्रावधान है।
साथ ही उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार केवल सूचना के लिए होता है लेकिन इसका उद्देश्य भी देखा जाना चाहिए। गोरखपुर नगर निगम मैं संतोष गुप्ता नामक एक व्यक्ति के द्वारा आरटीआई के तहत 118 आवेदन दिए गए हैं। उनसे इस संबंध में पूछा गया तो उन्होंने इतने सारे आरटीआई आवेदन के संबंध में कोई तर्कपूर्ण जवाब नहीं दे सके।
आदित्य बंदोपाध्याय के मामले का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि आदतन आरटीआई मांगने वाले के मामले को तर्कपूर्ण ढंग से खारिज भी किया जा सकता है। इस संबंध में उन्होंने सूचना अधिकारियों को ऐसा करने का निर्देश भी दिया गया है। वर्तमान समय में नगर निगम गोरखपुर के जन सूचना अधिकारी बी के लाल हैं।
जन सूचना के संबंध में की जाएगी विशेष सुनवाई
राज्य सूचना आयुक्त ने बताया कि गोरखपुर मंडल में आरटीआई के संबंध में 6000 से अधिक लंबित हैं। निश्चित तौर पर इनका निस्तारण धीमी गति से हो रहा है। इनके निस्तारण की गति बढ़ाने के लिए गोरखपुर मंडल में विशेष सुनवाई की जाएगी। 9 से 13 जनवरी तक 5 दिन में कुशीनगर देवरिया और महाराजगंज के मामलों की सुनवाई होगी। 16 और 17 जनवरी को गोरखपुर जिले के मामलों की सुनवाई की जाएगी।