1.40 करोड़ रुपये की ठगी के बाद तनाव में चल रहे डॉ. परमात्मा सिंह की आत्महत्या के मामले में पुलिस जांच में नया तथ्य सामने आया है। परिजन के अनुसार, आत्महत्या से एक दिन पहले 12 अगस्त की शाम चोलामंडल फाइनेंस कंपनी के कर्मचारी रिकवरी के लिए डॉक्टर के घर पहुंचे थे।
उस समय डॉक्टर घर पर नहीं थे। आरोप है कि कर्मचारियों ने उनके 12 वर्षीय बेटे से एक कागज पर जबरन हस्ताक्षर कराए। परिजन का यह भी आरोप है कि बच्चे से अभद्रता करने के साथ उसे धमकाया गया। रात में ड्यूटी से घर लौटे डॉक्टर को बेटे ने घटना की जानकारी दी।
परिजन के मुताबिक, इसके बाद वह बेहद परेशान हो गए और रातभर सो नहीं सके। अगले दिन 13 अगस्त की सुबह करीब 9:30 बजे उन्होंने अपाॅर्टमेंट की आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। सिर के बल सड़क पर गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
डॉ. परमात्मा सिंह ने 5 अगस्त को एम्स थाने में गरिमा सिंह, मोहन सिंह, विशाल यादव, साधना मल्ल, श्रुति सिंह समेत बैंक से जुड़े अज्ञात कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें करीब 1.40 करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया था।
डॉक्टर की मौत के बाद उनके चचेरे भाई की तहरीर पर गोरखनाथ थाने में गरिमा समेत सभी आरोपियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। गोरखनाथ पुलिस की जांच में विशाल यादव की भूमिका भी सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, विशाल गरिमा सिंह का करीबी परिचित है और लोगों को लोन दिलाने में उसकी अहम भूमिका रही है। शाहपुर के राधिका कॉम्प्लेक्स में उसके कार्यालय के बारे में भी पुलिस को जानकारी मिली है। आरोप है कि यहां लोगों को आसानी से लोन कराने का झांसा दिया जाता था। विशाल की तलाश में पुलिस कई जगह दबिश दे चुकी है। हालांकि आरोपी अभी पुलिस की पकड़ से दूर है।
गिरोह पर गैंगस्टर लगाने की तैयारी
पुलिस गरिमा सिंह और उसके गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जानकारी जुटा रही है। आरोपियों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की तैयारी है। पुलिस मंगलवार को कोर्ट में गरिमा को अपने मुकदमे में तलब करने और रिमांड पर लेकर पूछताछ की अनुमति के लिए आवेदन करेगी।
डॉ. परमात्मा सिंह की मौत के बाद उनका परिवार गोरखपुर से मऊ चला गया है। वहीं अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस परिजन के वापस आने के बाद उनके बयान दर्ज करेगी। सीओ गोरखनाथ रवि सिंह ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है।