लिटरेरी फेस्ट में अपनी बात रखते फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज।
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सिनेमा की दुनिया, सितारों के दांवपेंच, नई तकनीक के साथ बदलते सिनेमाई परिदृश्य। मुख्यधारा के हिंदी सिनेमा से लेकर भोजपुरी सिनेमा तक की दुनिया के बारे में बताने के लिए लिटरेरी फेस्ट में रविवार को हाजिर थे मशहूर फिल्म पत्रकार अजय ब्रह्मात्मज।
उन्होंने कहा कि सिनेमा को लेकर हमारे मन में तरह-तरह की छवियां है। ज्यादातर बुरी हैं पर सिनेमा की दुनिया और लोग हमारी दुनिया से ज्यादा बुरे नहीं। हमें यह सोच बदलनी होगी। एक बार जैकी श्रॉफ ने मुझसे पूछा कि हमारी आलोचना करने वालों में से कितने लोग एक ही शॉट के लिए सौ बार कीचड़ में लौट सकते हैं। 50 लोगों की कैमरा टीम के सामने किसी अपरिचित से मोहब्बत का नाटक कर सकते हैं। हम अपना काम करते हैं और जम कर कर रहे हैं। फिर भी आलोचना के केंद्र में क्यों हैं? मेरे पास जैकी के इस सवाल का कोई जवाब नहीं था।
प्रो. हर्ष सिन्हा के सवालों के जवाब के दौरान अजय ने कहा कि आजकल हिंदी सिनेमा में कड़ी मेहनत हो रही है। लोग न्यूनतम दो शिफ्ट में काम करते है। तो सिर्फ इसलिए क्योंकि वे जानते हैं कि हिंदी सिनेमा से ज्यादातर लोग दिल से जुड़े हैं। आप फिल्म जगत के लोगों को देखते हैं तो एक आत्मीय खुशी मिलती है जो नेता को देखने से नहीं मिलती। यही ताकत इस इंडस्ट्री को ऑक्सीजन देती है।
आजकल तेजी से लोकप्रिय होती वेब सीरीज में अश्लीलता एक अनिवार्य अंग बनती जा रही है क्या? यह सेंसर से आजादी का नतीजा है। इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि आजादी जो मिली है वह अच्छी बात है। अश्लीलता बढ़ी है लेकिन कंटेंट भी है। रही बात अश्लीलता की तो वह जल्दी ही खत्म हो जाएगी।