हालांकि, यह सच नहीं है कि केवल निर्मल प्रसाद ही आर्थिक मदद पाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। जिले के अन्य पांच फ्रंट लाइन वर्कर के परिजनों को भी आर्थिक मदद नहीं मिल पाई है। सभी आपदा कार्यालय से लेकर डीएम कार्यालय तक दौड़ लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री के गोरखनाथ मंदिर में आयोजित होने वाले जनता दरबार में भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
वहीं, आपदा कार्यालय के जिम्मेदारों से लेकर प्रभारी अधिकारी आपदा और डीएम सभी का कहना है कि सारी प्रक्रिया पूरी कर शासन को भेजी जा चुकी है। रिमाइंडर भी भेजा गया है। जल्द ही आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद है।
विद्युत विभाग में संविदा पर तैनात थे निर्मल के बेटे
निर्मल प्रसाद के बेटे विकलेश गौड़ विद्युत विभाग में संविदा पर तैनात थे। कोरोना में ड्यूटी के दौरान कोविड संक्रमण की वजह से उनकी मौत हो गई। विभाग से सत्यापन सहित सभी जरूरी औपचारिकताएं पूरी कर आपदा विभाग ने 50 लाख रुपये की आर्थिक मदद के लिए फाइल शासन को भेजी है, लेकिन मदद आज तक नहीं मिली।
आर्थिक मदद के इंतजार में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के तौर पर तैनात रहीं स्वर्गीय विमला शुक्ला, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में ब्लॉक मिशन प्रबंधक रहे स्वर्गीय अर्जुन ओझा, राजस्व विभाग में संग्रह अनुसेवक पद पर तैनात रहे स्वर्गीय राजीव कुमार गौड़ और स्वास्थ्य विभाग के तहत चरगांवा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड ब्वाय के तौर पर तैनात रहे स्वर्गीय विकास सिंह के परिजनों का भी नाम शामिल है।
इलाज का कर्ज चुकाने में ही खत्म हो जा रही तनख्वाह: रीना
कलेक्ट्रेट में संग्रह अनुसेवक के पद पर तैनात राजीव कुमार गौड़ का नाम भी कोरोना में जान गंवाने वाले फ्रंट लाइन वर्कर की सूची में दर्ज है। राजीव की मौत के बाद उनकी पत्नी रीना देवी को उनकी जगह नौकरी तो मिल गई, लेकिन आर्थिक मदद अब तक नहीं मिली है। सोमवार को वह भी आपदा कार्यालय में पैरवी के लिए पहुंची थीं।
उनका कहना था कि करीब साल भर पहले पति की जगह नौकरी मिली, लेकिन जो तनख्वाह मिलती है, उसका ज्यादातर हिस्सा पति के इलाज में लिए गए चार लाख रुपये के कर्ज को चुकाने में चला जाता है। रीना कहती हैं कि बेटी 19 साल की हो गई है। पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल हो रहा है। आर्थिक मदद मिल जाती तो बेटी के हाथ पीले करने में मदद मिलती।
10 फ्रंट लाइन वर्कर के परिजनों को मिल चुकी है 50 लाख की मदद
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जान गंवाने वाले जिले के 10 फ्रंट लाइन वर्करों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। पत्नी, बेटा व बेटी में से पात्रों को नौकरी भी मिल चुकी है।