गोरखपुर। सहजनवां के गांव तिलौरा की बेटी रितिका दूबे ने मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर भारतीय सेना में अधिकारी बनकर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। वह अपने रेजिमेंट में इकलौती महिला अधिकारी हैं।
रितिका के पिता रामनिवास धर्म दुबे किसान और मां गीता दुबे गृहिणी हैं। रितिका की जम्मू में पोस्टिंग हुई है। परिवार में दो भाई और एक बहन हैं। वह सबसे बड़ी हैं। भाई आर्यन दूबे एमएससी बिजनेस एनालिटिक्स की पढ़ाई कर रहे हैं जबकि छोटा भाई यश दूबे आठवीं कक्षा में है। रितिका की शुरुआती पढ़ाई आरपीएम एकेडमी में हुई। इसके बाद उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में स्नातक किया। आर्थिक संसाधन सीमित होने के बावजूद उनकी अब तक की पढ़ाई मुख्य रूप से छात्रवृत्ति के सहारे हुई। रितिका को शुरू से ही सेना में जाने का सपना था। उन्होंने यूपीएससी सीडीएस परीक्षा पास करने के बाद एसएसबी साक्षात्कार भी पहली कोशिश में सफलतापूर्वक पार किया।
सितंबर 2025 में उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी में प्रशिक्षण शुरू किया। कठोर प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने शारीरिक क्षमता, मानसिक दृढ़ता और नेतृत्व कौशल को और मजबूत किया। पढ़ाई के साथ रितिका खेलों में भी सक्रिय रहीं। उन्होंने क्लस्टर स्तर और राष्ट्रीय स्तर की एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं में स्कूल और क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। विभिन्न सामाजिक और शैक्षिक संस्थाओं से जुड़कर भी उन्होंने काम किया। रितिका का कहना है कि सेना की वर्दी उनके लिए सिर्फ नौकरी नहीं बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान है। वह ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।