मशहूर लोकगीत गायक भरत शर्मा व्यास।
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लोक गीत समाज और संस्कृति का आईना होते हैं, इनकी धुन में क्षेत्रीय पहचान रची बसी होती है। संगीत और उच्चारण का बरसों रियाज करने के बाद एक लोकगीत गायक तैयार होता है। दुख की बात है कि रीमिक्स और अश्लील गीतों को लोकगीतों की धुन देकर इस विधा के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यह कहना है मशहूर लोकगीत गायक भरत शर्मा व्यास का। वह गोरखपुर महोत्सव में पूर्वांचल के लोकजीवन को संगीत के रूप में प्रस्तुत करने गोरखपुर आए हुए थे।
महोत्सव में अमर उजाला से बातचीत में भरत शर्मा व्यास ने रीमिक्स के नाम पर लोकगीतों का स्वरूप बिगाड़े जाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताते हुए कहा कि टेक्नोलॉजी के इस युग में बिना रियाज के भी लोग गायक बन जाते हैं। रीमिक्स के नाम पर पुराने गानों की मधुरता नष्टकर यह नए कलाकार कुछ समय के लिए तो लाइमलाइट में आ जाते हैं, लेकिन इससे यह प्रवृत्ति संगीत को बहुत नुकसान पहुंचा रही है।
भरत शर्मा का मानना है कि जनता भोजपुरी में रीमिक्स को नकार देगी, क्योंकि इसमें संगीत का मूल स्वरूप खराब हो जाता है। टीवी पर चलने वाले संगीत टैलेंट हंट शो को भी उन्होंने संगीत को नुकसान पहुंचाने वाला करार दिया। इन रियलिटी शो में बिना रियाज या संगीत की आधी अधूरी जानकारी रखने वाले युवाओं को बड़ा मंच मिल जाता है। ग्लैमर की चकाचौंध में ये कलाकार खुद को बहुत बड़ा समझने लगते हैं और कुछ ही दिन में इनका नाम भुला दिया जाता है।