बुधवार की शाम महिला को सांस लेने की दिक्कत होने लगी। परिजनों ने डॉक्टरों से संपर्क कर सांस की दिक्कत बताई। डॉक्टर ने मरीज की जांच करके वेंटिलेटर की जरूरत बताई। लेकिन, वेंटिलेटर खाली न होने का हवाला देते हुए मरीज को आईसीयू में नहीं शिफ्ट किया गया।
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वहीं, रात में सुनीता की हालत बिगड़ती गई और रात करीब आठ बजे उसकी मौत हो गई। मौत के बाद परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका आरोप है कि अगर समय से वेंटिलेटर मिल गया होता और इलाज बेहतर होता तो जान बच गई होती।
नेहरू अस्पताल के अधीक्षक डॉ. राजेश राय ने कहा कि मरीज का ऑपरेशन मेडिकल कॉलेज में किया गया था। डॉक्टर ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की, लेकिन मरीज की हालत ज्यादा गंभीर हो गई और मौत हो गई। लापरवाही का आरोप पूरी तरह से गलत है।