नेपाल की तबाही ने गोरखपुर में रह रहे नेपाली परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। किसी को माता-पिता की फिक्र है तो कोई रिश्तेदारों की सलामती के लिए लगातार फोन कर रहा है। तबाही के बीच अपनों की खोज-खबर और मदद की उम्मीद की पूरी कहानी पढ़िए।
गोरखपुर जिले में बसे नेपाली परिवारों के लिए नेपाल सिर्फ एक देश नहीं बल्कि उनकी जन्मभूमि है। उस सरजमीं से उनकी यादें जुड़ी हैं, उनके अनमोल रिश्तों का खजाना छिपा है। वहां की तबाही की तस्वीरें यहां रहने वालों की आंखों में भी आंसू ला रही हैं। किसी की नजर मोबाइल पर है तो कोई टीवी पर खबरें देख रहा है। कोई रिश्तेदार से बात कर रहा है तो कोई हाथ जोड़कर भगवान से प्रार्थना कर रहा है। सबकी जुबान पर बस एक ही बात है। 'हे भगवान, अब बस... कोई और बुरी खबर मत सुनाना।'
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शहर में रहकर रोजी-रोटी कमाने वाले लोग अपने रिश्तेदारों की सलामती को लेकर दिन-रात चिंतित हैं। डर इस बात का है कि कहीं अगली फोन कॉल कोई ऐसी खबर न लेकर आए जिसे सुनने की हिम्मत भी न हो। नेपाल में रहने वाले अपने लोगों से लगातार फोन पर हाल-चाल लिया जा रहा है। वहां से आने वाली दहशत और तबाही की बातें सुनकर यहां बैठे परिजनों की आंखें नम हो जा रही हैं। लोगों का कहना है कि त्रासदी में कई घर-परिवार उजड़ गए। अब हर पल यही डर सता रहा है कि कहीं कोई और अनहोनी न हो जाए।
हर घंटे फोन, माता-पिता की सलामती की चिंता
हनुमंत नगर के पास रहने वाले श्याम प्रसाद शर्मा के परिवार की चिंता भी कुछ ऐसी ही है। उनकी पत्नी उर्मिला शर्मा का मायका नेपाल के नारायण घाट में है। नेपाल में उर्मिला की मां एम कला सूबेदी और पिता कृष्णा सूबेदी, भाई विश्वास शर्मा के साथ रहते हैं। उर्मिला ने बताया कि त्रासदी की खबर सुनकर दिल दहल गया। वह गोरखपुर में ब्यूटी पार्लर चलाती हैं लेकिन इन दिनों काम में बिल्कुल मन नहीं लग रहा। उन्होंने कहा कि मां-पिता और भाई नेपाल में हैं।
वे लोग घटनास्थल से दूर हैं फिर भी डर लगा रहता है। कभी-कभी हर आधे घंटे में फोन करके उनका हाल पूछती हूं। फोन उठने तक मन में तरह-तरह के ख्याल आते रहते हैं। उर्मिला के पति रेती चौक पर एक चार्टर्ड अकाउंटेंट के यहां काम करते हैं। वह भी बार-बार फोन करके मायके वालों का हाल पूछते हैं। उर्मिला ने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत की ओर से नेपाल को सहायता भी पहुंचाई जा रही है ऐसा सुनने में आ रहा है। उन्होंने इसे भारत सरकार और प्रधानमंत्री की संवेदनशीलता बताते हुए कहा कि मुश्किल समय में भारत का साथ मिलना बड़ी बात है।
भाई, जल्दी गोरखपुर आ जाओ... तुम्हारी बहुत चिंता हो रही
मानस विहार कॉलोनी, जंगल शालिग्राम निवासी सूरज बहादुर करीब 50 वर्षों से पूरे परिवार के साथ गोरखपुर में रह रहे हैं। परिवार के पांच सदस्य यहां अलग-अलग काम कर अपनी रोजी-रोटी चलाते हैं। उनके भांजे दीपू भी उनके साथ रहते हैं जबकि दीपू के भाई तिल बहादुर भैरहवा में हैं। दीपू ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह भाई तिल बहादुर से फोन पर बात हुई। वह त्रासदी वाले स्थान से काफी दूर हैं लेकिन वहां भी डर का माहौल है। दीपू ने कहा कि हम दिन में दो बार भाई से बात कर रहे हैं। टीवी और मोबाइल पर लगातार नजर है। सुबह भाई से कहा कि जल्दी से गोरखपुर आ जाओ, तुम्हारी बहुत चिंता हो रही है।
नेपाल में रहने वाले लोग परिचितों की ले रहे खोज-खबर
गोरखपुर। नेपाल में बुधवार को आई भीषण तबाही के बाद सबसे बड़ी चिंता अब अपनों की सलामती को लेकर है। सुरक्षित जगहों पर मौजूद लोग लगातार अपने परिचितों और रिश्तेदारों को फोन कर पूछ रहे हैं- तपाईं सुरक्षित हुनुहुन्छ (आप सुरक्षित हैं)। कई कॉलेजों में भी छात्र-छात्राओं और उनके परिजन की जानकारी जुटाई जा रही है। दूसरी ओर तबाही के वीडियो देखकर सुरक्षित इलाकों में रह रहे लोगों के बीच भी डर और बेचैनी है। बाढ़ में कई बस्तियों के बह जाने की सूचना है। हालांकि अभी मृतकों और प्रभावित लोगों की सही संख्या सामने नहीं आई है। इसी वजह से लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। जिन इलाकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, वहां रहने वाले परिचितों की खोज-खबर लेने के लिए लोग लगातार फोन कर रहे हैं।
काठमांडो स्थित त्रिभुवन यूनिवर्सिटी के मनोविज्ञान विभाग के डॉ. नरेंद्र सिंह थगुन्ना ने बताया कि मौजूदा त्रासदी वर्ष 2015 के भूकंप से भी बड़ी हो सकती है। बड़ी संख्या में लोग प्रभावित इलाकों में फंसे हैं और अभी नुकसान का सही आकलन नहीं हो पाया है। उन्होंने बताया कि काठमांडो के आसपास हाईवे का बड़ा हिस्सा प्रभावित हुआ है। कुछ कॉलेज छात्र-छात्राओं और उनके परिवारों के भी प्रभावित इलाकों में फंसे होने की जानकारी है। राहत और बचाव दल लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हैं।
उनके मुताबिक, कई हाइड्रोपावर प्लांट भी बाढ़ की चपेट में आए हैं। बाढ़ में नदी के पानी के साथ ग्लेशियर का पानी भी आया है। करीब 20 पुलों के बह जाने की जानकारी है। ऐसे में मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। डॉ. थगुन्ना ने बताया कि फिलहाल पानी का स्तर कुछ कम हुआ है लेकिन ऊपरी इलाकों में ग्लेशियर का कुछ हिस्सा अभी भी मौजूद है। यही वजह है कि लोगों में चिंता बनी हुई है। नेपाल में इस समय हर तरफ इसी त्रासदी और अपनों की सलामती की चर्चा है।
वीडियो देख दिल दहल गया
पालपा मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक्स विभाग के डॉ. राजीव द्विवेदी ने बताया कि पालपा का इलाका फिलहाल पूरी तरह सुरक्षित है। बाढ़ और तबाही के वीडियो देखकर दिल दहल गया। इसके बाद से ही प्रभावित इलाकों में रहने वाले परिचितों और रिश्तेदारों की लगातार खोज-खबर ली जा रही है। उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोग इस समय काफी डरे हुए हैं। सबसे ज्यादा चिंता उन लोगों की है जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है।