मरीज की मौत की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टरों ने मरीज की मौत की सूचना नहीं दी। वह मरीज को बेवजह दवा देते रहे। इतना ही नहीं उन्होंने कोरोना का एक इंजेक्शन लगाने के नाम पर 40 हजार रुपये भी मांगे।
दो लाख रुपये इलाज के लिए दिए भी गए। लेकिन इसके बाद भी रुपये की मांग की गई। हंगामे की सूचना पर सीओ कैंपियरगंज, चौकी इंचार्ज पिपरौली, चौकी इंचार्ज नौसढ़ और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा। इसके बाद किसी तरह मामले को शांत कराया।
संचालक डॉ. डीपी सिंह ने बताया कि मरीज जब भर्ती हुआ तो उसकी हालत नाजुक थी। उसके फेफड़े में सूजन था। वह सांस नहीं ले पा रहा था। कोविड जांच रिपोर्ट नहीं थी। लक्षण के बाद इलाज शुरू कर नमूना जांच के लिए भेजा गया था। शुक्रवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। शनिवार को अचानक तबीयत बिगड़ी। इस पर बचाने का प्रयास किया गया लेकिन सफलता नहीं मिली। तीमारदारों को टोसिलिजुमैब इंजेक्शन खरीदने को कहा गया था। अधिक रुपये लेने की बात पूरी तरह से निराधार है।