कलेक्ट्रेट में संग्रह अनुसेवक के पद पर तैनात राजीव कुमार गौड़ का नाम भी कोरोना में जान गंवाने वाले फंट लाइन वर्कर की सूची में दर्ज है। राजीव की मौत के बाद उनकी पत्नी रीना देवी को उनकी जगह नौकरी तो मिल गई मगर आर्थिक मदद अभी तक नहीं मिल रही थी।उनका कहना है कि करीब साल भर पहले पती की जगह नौकरी मिली। मगर जो तनख्वाह मिलती है, उसका ज्यादातर हिस्सा पति राजीव के इलाज में लिए गए चार लाख के कर्ज को चुकाने में चला जाता है। रीना कहती हैं कि बेटी 19 साल की हो गई है। पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल पड़ रहा था। शादी की चिंता अलग सता रही थी। मगर अब आर्थिक मदद मिल जाने से बेटी की पढ़ाई और शादी हो सकेगी।
10 फ्रंटलाइन वर्कर के परिजनों को मिल चुकी है 50 लाख की मदद
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जान गंवाने वाले जिले के 10 फ्रंटलाइन वर्करों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। पत्नी, बेटा व बेटी में से पात्रों को नौकरी भी मिल चुकी है।