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UP: इकलौते बेटे को खोने वाले निर्मल प्रसाद का नहीं खत्म हुआ इंतजार, अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे

Wed, 01 Feb 2023 03:04 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

पिता निर्मल प्रसाद गौड़ का इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ। उनका बेटा विद्युत विभाग में संविदा पर तैनात था। कोरोना में ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई थी। विकलेश के परिजनों को आर्थिक मदद के लिए स्थानीय प्रशासन एक साल पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज शासन को भेज चुका है। मगर इस बार भी उनका इंतजार नहीं खत्म हुआ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोरोना काल में काम करते हुए जान गंवाने वाले तीन और फ्रंटलाइन कर्मचारियों के परिजनों को  50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता शासन ने जारी कर दी है। आपदा विभाग के संयोजक गौतम गुप्ता ने बताया कि समेकित बाल विकास विभाग की स्व. विमला शुक्ला, ग्राम विकास विभाग के स्व. अर्जुन कुमार ओझा व राजस्व विभाग के स्व. राजीव कुमार गौड़ के परिजनों को यह आर्थिक सहायता मिली है।

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वहीं एकलौते बेटे विकलेश गौड़ को कोरोना में खोने वाले गोपलापुर के निर्मल प्रसाद गौड़ का इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ। उनका बेटा विद्युत विभाग में संविदा पर तैनात था। कोरोना में ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई थी। विकलेश के परिजनों को आर्थिक मदद के लिए स्थानीय प्रशासन एक साल पहले ही सभी जरूरी दस्तावेज शासन को भेज चुका है। मगर इस बार भी उनका इंतजार नहीं खत्म हुआ।

पौत्र, बहू और बुजुर्ग पत्नी के भविष्य के लिए परेशान निर्मल प्रसाद रोजाना आपदा कार्यालय और डीएम दफ्तर के चक्कर लगा रहे थे। फरियाद में ही उनका ज्यादातर समय बीत रहा था।  कुछ दिन पहले वह गंभीर रुप से बीमार पड़ गए। लखनऊ के अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है जहां वह अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। इसी तरह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत रहे स्व. विकास सिंह के परिजनों को भी अभी आर्थिक सहायता नहीं मिल पाई है।
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इलाज का कर्ज चुकाने में खत्म हो जा रही थी तनख्वाह

कलेक्ट्रेट में संग्रह अनुसेवक के पद पर तैनात राजीव कुमार गौड़ का नाम भी कोरोना में जान गंवाने वाले फंट लाइन वर्कर की सूची में दर्ज है। राजीव की मौत के बाद उनकी पत्नी रीना देवी को उनकी जगह नौकरी तो मिल गई मगर आर्थिक मदद अभी तक नहीं मिल रही थी।उनका कहना है कि करीब साल भर पहले पती की जगह नौकरी मिली। मगर जो तनख्वाह मिलती है, उसका ज्यादातर हिस्सा पति राजीव के इलाज में लिए गए चार लाख के कर्ज को चुकाने में चला जाता है। रीना कहती हैं कि बेटी 19 साल की हो गई है। पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल पड़ रहा था। शादी की चिंता अलग सता रही थी। मगर अब आर्थिक मदद मिल जाने से बेटी की पढ़ाई और शादी हो सकेगी।

10 फ्रंटलाइन वर्कर के परिजनों को मिल चुकी है 50 लाख की मदद
कोरोना की पहली और दूसरी लहर में जान गंवाने वाले जिले के 10 फ्रंटलाइन वर्करों के परिजनों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिल चुकी है। पत्नी, बेटा व बेटी में  से पात्रों को नौकरी भी मिल चुकी है।
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