समिति ने 14 अप्रैल से 13 मई तक के सीसीटीवी फुटेज और टिकट बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया तो कई दिनों के आंकड़ों में गड़बड़ी मिली। समिति की रिपोर्ट के अनुसार 19 अप्रैल को सीसीटीवी फुटेज में दर्ज दर्शकों की संख्या और अभिलेखों में दर्ज टिकटों की संख्या में लगभग 440 लोगों का अंतर पाया गया।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में फर्जी टिकटों के जरिए राजस्व गबन का मामला सामने आया है। चिड़ियाघर प्रशासन की प्रारंभिक जांच में वन विभाग के एक कर्मचारी और चार निजी कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। चारों निजी कर्मियों को हटा दिया गया है।
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सूत्रों के अनुसार, प्राणि उद्यान में काफी समय से टिकट काउंटर के कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर बदलकर फर्जी। टिकट निकाला जा रहा था। इसका पता फरवरी महीने में पार्किंग में 450 रुपये की गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद चला।
इस पर प्राणि उद्यान के निदेशक सूरज कुमार के निर्देश पर उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में रेंजर वन गौरव वर्मा व रेंजर सेकंड श्याम बिहारी सिंह की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने 14 अप्रैल से 13 मई तक के सीसीटीवी फुटेज और टिकट बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया तो कई दिनों के आंकड़ों में गड़बड़ी मिली।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार 19 अप्रैल को सीसीटीवी फुटेज में दर्ज दर्शकों की संख्या और अभिलेखों में दर्ज टिकटों की संख्या में लगभग 440 लोगों का अंतर पाया गया। इससे एक ही दिन में करीब 22 हजार रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह आंकड़ा अधिक हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वन दरोगा एवं बीट प्रभारी तृतीय शैलेश कुमार गुप्ता अनधिकृत रूप से टिकट काउंटर
नंबर तीन पर पहुंचकर कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट निकालते थे। जांच में शैलेश के अलावा निजी कर्मियों अमन यादव, हरिशंकर चौहान, खुशबू सिंह और अंशुमान सिंह के नाम सामने आए, जिसके बाद चारों को हटा दिया गया।
पार्किंग में 450 रुपये की गड़बड़ी ने खोली कहानी
प्राणि उद्यान में फर्जी टिकट से राजस्व को नुकसान पहुंचाने का मामला पार्किंग टिकट में मात्र 450 रुपये की गड़बड़ी से सामने आया। बताया जा रहा है कि जनवरी और फरवरी में प्राणि उद्यान के सुरक्षा गार्डों की तैनाती में बदलाव किया गया। इसके तहत टिकट काउंटर के सुरक्षा गार्डों को पार्किंग में तैनाती दे दी गई।
पार्किंग की पर्ची दो कॉपी होती है। एक गाड़ी वाले को दे दी जाती है, दूसरी ऑफिस की कॉपी होती है। शाम को जमा की गई गड्डी में सामने आया कि कुछ बंडल में दोनों पर्ची ही गायब थी। उदाहरण के तौर पर जमा करने के दौरान गड्डी का मिलान 1 से 30 नंबर मिलाया जाता था।
इसी के अनुपात में 50 रुपये से गुणा कर उस गड्डी की धनराशि को जमा किया जाता। इसी मिलान में 9 पर्ची की 450 रुपये की गड़बड़ी सामने आई। निदेशक ने मामले में शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित की और जांच में 440 लोगों के रिकार्ड में गड़बड़ी मिल गई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिनों पहले काउंटर का जिम्मा शैलेश से लेकर नीरज सिंह को दे दिया गया। बताया कर जाता है कि कुछ जिम्मेदारों ने नीरज व को शैलेश की मदद लेने की सलाह भी के दी थी। इसी का फायदा उठाकर शैलेश समझाने और बताने टिकट काउंटर पर आता था।
इस दौरान मौका पाकर कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट बनाकर दर्शकों को दे देता था। सॉफ्टवेयर वाले टिकट का पैसा आपस में बांट लेते थे।