इस पर प्राणि उद्यान के निदेशक सूरज कुमार के निर्देश पर उप निदेशक डॉ. योगेश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में रेंजर वन गौरव वर्मा व रेंजर सेकंड श्याम बिहारी सिंह की तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई। समिति ने 14 अप्रैल से 13 मई तक के सीसीटीवी फुटेज और टिकट बिक्री के रिकॉर्ड का मिलान किया तो कई दिनों के आंकड़ों में गड़बड़ी मिली।
समिति की रिपोर्ट के अनुसार 19 अप्रैल को सीसीटीवी फुटेज में दर्ज दर्शकों की संख्या और अभिलेखों में दर्ज टिकटों की संख्या में लगभग 440 लोगों का अंतर पाया गया। इससे एक ही दिन में करीब 22 हजार रुपये के राजस्व नुकसान का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि यह आंकड़ा अधिक हो सकता है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि वन दरोगा एवं बीट प्रभारी तृतीय शैलेश कुमार गुप्ता अनधिकृत रूप से टिकट काउंटर
नंबर तीन पर पहुंचकर कंप्यूटर सिस्टम से छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट निकालते थे। जांच में शैलेश के अलावा निजी कर्मियों अमन यादव, हरिशंकर चौहान, खुशबू सिंह और अंशुमान सिंह के नाम सामने आए, जिसके बाद चारों को हटा दिया गया।
इसी के अनुपात में 50 रुपये से गुणा कर उस गड्डी की धनराशि को जमा किया जाता। इसी मिलान में 9 पर्ची की 450 रुपये की गड़बड़ी सामने आई। निदेशक ने मामले में शिकायत के आधार पर जांच टीम गठित की और जांच में 440 लोगों के रिकार्ड में गड़बड़ी मिल गई।
सूत्रों के अनुसार, कुछ दिनों पहले काउंटर का जिम्मा शैलेश से लेकर नीरज सिंह को दे दिया गया। बताया कर जाता है कि कुछ जिम्मेदारों ने नीरज व को शैलेश की मदद लेने की सलाह भी के दी थी। इसी का फायदा उठाकर शैलेश समझाने और बताने टिकट काउंटर पर आता था।
इस दौरान मौका पाकर कंप्यूटर के सॉफ्टवेयर में छेड़छाड़ कर फर्जी टिकट बनाकर दर्शकों को दे देता था। सॉफ्टवेयर वाले टिकट का पैसा आपस में बांट लेते थे।