फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

फर्जी शिक्षक मामला : डीडीयू के जिम्मेदारों ने बना दी गलत रिपोर्ट, पकड़ी गई

विज्ञापन
विज्ञापन
गड़बड़ी सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने बनाई जांच कमेटी, एसटीएफ को रिपोर्ट भेजने के पहले मामला उजागर
विज्ञापन

एसटीएफ ने बेसिक शिक्षा विभाग के फर्जी शिक्षकों के मामले में मांगी थी मार्कशीट सत्यापन रिपोर्ट
गोरखपुर विश्वविद्यालय में प्राइमरी शिक्षक की मार्कशीट की चल रही जांच


संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में एक बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। बेसिक शिक्षा विभाग में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ हो रही जांच में एसटीएफ ने विश्वविद्यालय से मार्कशीट सत्यापन रिपोर्ट मांगी थी। खबर है कि जिम्मेदारों ने अपनी रिपोर्ट में मार्कशीट को सही ठहरा दिया। जब उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो एक कमेटी बनाकर जांच शुरू करा दी है। अधिकारियों ने मामले से कुलपति को अवगत कराकर जिम्मेदारों पर कार्रवाई की संस्तुति भी की है। चर्चा है कि इस मामले में तीन जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो सकती है।
दरअसल, वर्ष 2019 में फर्जी प्रमाण पत्र के सहारे नौकरी कर रहे शिक्षकों के खिलाफ बेसिक शिक्षा विभाग ने कार्रवाई की थी। इसमें शामिल एक शिक्षिका के मार्कशीट की जांच के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी अपनी कमेटी बनाई थी। कमेटी की जांच अभी चल ही रही थी कि इसी मामले की जांच यूपी एसटीएफ को भी दे दी गई। गोरखपुर इकाई ने शिक्षकों के प्रपत्रों की जांच शुरू की। इसी बीच एसटीएफ ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पत्र भेजकर दो शिक्षकों की मार्कशीट के सत्यापन की रिपोर्ट मांग ली।
विज्ञापन

खबर है कि इसमें से एक शिक्षिका की मार्कशीट को सही बताकर एसटीएफ प्रभारी को रिपोर्ट भेजने की तैयारी थी कि इसी बीच विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचना लग गई। रिपोर्ट को रोक दिया गया और सारे दस्तावेज अधिकारियों ने मंगा लिए हैं। विश्वविद्यालय सूत्रों की मानें तो शिक्षिका के प्रमाण पत्रों के अंकों में टेंपरिंग (छेड़छाड़) की गई थी, लेकिन जिम्मेदारों ने एसटीएफ को जो रिपोर्ट भेजने की तैयारी की थी उसमें प्रमाण पत्रों को सही बता दिया। इसकी जानकारी दो दिन बाद ही विश्वविद्यालय के अफसरों को हो गई। खुद को उलझता देख पांच दिन पहले उस रिपोर्ट पर आपत्ति जताने के साथ विभागीय जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कुलपति को पत्र लिखा गया है।

जिम्मेदारों पर गिर सकती है गाज
गलत रिपोर्ट देने में विश्वविद्यालय की ओर से जांच शुरू हो गई है। मामले में कुल तीन जिम्मेदार रडार पर हैं। बीते शुक्रवार को जांच कमेटी ने बैठक कर मामले पर विचार किया। इसमें शामिल कर्मचारी और अधिकारियों पर विश्वविद्यालय प्रशासन कड़ी कार्रवाई कर सकता है। चर्चा है कि मामला उजागर होने के बाद इसमें शामिल एक कर्मचारी छुट्टी पर चला गया। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो एक अधिकारी के ट्रांसफर को लेकर भी कवायद शुरू हो गई है।
हर महीने आती है दो-तीन जांच
मार्कशीट को लेकर विश्वविद्यालय में हर महीने दो से तीन जांच आती है। एक मामले में गड़बड़ी उजागर होने के बाद अब पिछले कुछ समय में दी गई रिपोर्ट की भी जांच हो सकती है। विश्वविद्यालय को शक है कि कहीं पिछले मामलों में भी तो गलत रिपोर्ट नहीं चली गई।
2021 में 100 शिक्षकों पर शुरू हुई थी जांच
एसटीएफ ने 2021 में गोरखपुर मंडल के करीब 100 शिक्षकों के खिलाफ जांच शुरू की थी। ये सभी फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रहे थे। इसमें गोरखपुर जनपद के करीब 30 शिक्षक शामिल थे। इसके पहले 2019 में बेसिक शिक्षा विभाग ने दो फर्जी शिक्षकों को बर्खास्त किया था। साथ ही संदिग्ध 15 शिक्षकों को निलंबित कर उनपर जांच बैठा दी थी। सूत्रों का कहना है कि जिस शिक्षिका की गलत रिपोर्ट एसटीएफ को भेजी जाने वाली थी, वह संदिग्ध 15 की सूची में शामिल है।
विज्ञापन



मार्कशीट सत्यापन को लेकर एसटीएफ की ओर से कई पत्र आए थे। एक के दस्तावेजों के सत्यापन रिपोर्ट में कुछ खामियां मिला हैं, जिसे रोक दिया गया। मामले की जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें