कानपुर के भुवन चंद्र पाठक की आंखों से अब दूसरों की दुनिया रोशन होगी और उनके पार्थिव शरीर से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के छात्र पढ़ाई करेंगे। युग दधीचि संस्थान कानपुर ने एम्स गोरखपुर को भुवन चंद्र पाठक का पार्थिव शरीर शुक्रवार को उपलब्ध कराया है। एम्स प्रशासन ने संस्थान और उनके परिवार के प्रति आभार जताया है। इससे पहले उनकी कार्निया कानपुर मेडिकल कॉलेज को उपलब्ध कराई गई है।
जानकारी के मुताबिक, अग्निहोत्र नगर मकड़ी खेड़ा नवाबगंज कानपुर के रहने वाले भुवन चंद्र पाठक (83) ने वर्ष 2012 में देहदान संकल्प पत्र भरा था। 24 नवंबर को शाम तीन बजे उनका निधन हो गया। निधन की जानकारी उनके पौत्र मनीष पाठक ने दधीचि देहदान संस्थान के देहदान अभियान प्रमुख मनोज सेंगर को फोन करके दी। साथ ही देहदान का आग्रह किया।
मनोज सेंगर ने पार्थिव शरीर को एम्स गोरखपुर को दान करने का फैसला लिया। इससे पहले मनोज ने बृहस्पतिवार को कानपुर मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विशेषज्ञ से संपर्क करते हुए कार्निया का दान कराया। शुक्रवार की सुबह मनीष के घर पहुंचकर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपन्न कराया।
इसके बाद सुबह नौ बजे कानपुर से पार्थिव शरीर को लेकर शाम पांच बजे गोरखपुर पहुंचे, जहां एनाटमी हेड डॉ विवेक मिश्रा ने सहयोगियों के साथ देह को ससम्मान स्वीकार किया। कानपुर से देह को रवाना करते समय भुवन चंद्र पाठक के छोटे भाई बृज मोहन पाठक, कैलाश चंद्र पाठक, राजेश पाठक पौत्र मनीष पाठक, हर्षित एवं साले सुभाष चंद्र चौबे और उनके रिश्तेदार मौजूद थे।
16 दिन के अंदर एम्स को मिला दूसरा शरीर
दधीचि देहदान संस्थान ने अक्तूबर 2019 में एम्स को पहला शरीर ज्योतिमा दीक्षित का उपलब्ध कराया था। इसके बाद डॉ संतलाल की देह दिसंबर 2019 में दान की गई। कोरोना के कारण तीन साल तक कोई दान नहीं हो सका। तीसरा देहदान नौ नवंबर को हुआ था। इस बीच 16 दिन बाद शुक्रवार को चौथा शरीर एम्स को मिला है।