धंधेबाजों ने औषधीय गुणों वाली हल्दी को भी नहीं छोड़ा है। वजन बढ़ाने के लिए पीले रंग की कोटिंग करते हैं और चमक के लिए लेड क्रोमेट मिलाते हैं। जिस हल्दी को आप खाते हैं हो सकता है कि ऊपर से चमकती नजर आए पर अंदर से वह खराब गांठ हो सकती है।
धंधेबाज मुनाफे के लिए खराब गांठ के ऊपर इसकी कोटिंग कर बेच रहे हैं। यह सेहत के लिए बेहद खतरनाक है। डॉक्टरों का कहना है कि मिलावट वाली हल्दी को खाने से कैंसर का खतरा बना रहता है।
हल्दी का प्रयोग हर घर में होता है। सेहत के लिहाज से इसे काफी फायदेमंद माना जाता है। हल्दी में मौजूद औषधीय गुण इसे सबसे शक्तिशाली मसालों में से एक बनाते हैं। मिलावटखोरों ने इसे भी जहरीला बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक गोरखपुर में मिलावटी हल्दी की सप्लाई कानपुर से की जा रही है।
छोटे शहरों से कच्छी हल्दी (20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम) के भाव से थाेक में खरीदकर कानपुर भेजी जाती है। वहां इसमें से जो अच्छी गांठ होती है उसे अलग कर लिया जाता है। खराब हल्दी के ऊपर पीले रंग या लेड क्रोमेट की कोटिंग कर दी जाती है, जिससे उसमें चमक आ जाती है।
इसके बाद दोनों को मिलाकर बाजार में पहुंचाया जाता है। चमकाने के बाद इसका भाव 240 से 320 रुपये प्रति किलोग्राम हो जाता है। इसी गांठ को पीसकर धंधेबाज बेच देते हैं और मोटा मुनाफा कमाते हैं।
10 हजार क्विंटल हर महीने खपत
गोरखपुर शहर में हर महीने 10 हजार क्विंटल हल्दी की खपत होती है। इसमें करीब 40 प्रतिशत माल मिलावटी है। साहबगंज किराना कमेटी के मंत्री गोपाल जायसवाल ने बताया कि खाद्य पदार्थों में मिलावट को लेकर विभाग को सूचित किया जाता है। मिलावट की वजह से सही माल बेचने वाले व्यापारियों को परेशानी होती है।
मिलावटी हल्दी से कैंसर का खतरा
आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. एसके तिवारी ने बताया कि हल्दी में औषधीय गुण होते हैं। लेकिन मिलावटी हल्दी खाने से सेहत को कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। मिलावटी हल्दी में अक्सर कैंसर कारक पदार्थ जैसे कि लेड, कैडमियम और मरकरी मिलाए जाते हैं, जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं। इसमें मिलावट से पाचन समस्याएं हो सकती हैं। कई बार इससे एलर्जी भी हो सकती है।