गीडा के स्थापना दिवस समारोह के अंतिम दिन बैंकिंग व्यवस्था पर हुई चर्चा
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। गीडा के 34वें स्थापना दिवस पर आयोजित समारोह के अंतिम दिन एमएसएमई और गैर एमएसएमई क्षेत्र को नए युग की बैंकिंग प्रौद्योगिकी की पेशकश विषय पर गोष्ठी हुई। इसमें बैंकिंग सेक्टर किस तरह से उद्यमियों की मदद कर रहा है, इस पर चर्चा की गई। गीडा सीईओ अनुज मलिक ने कहा कि उद्यमी उद्योग लगाने के लिए आगे आएं, बैंक पूरा सहयोग करेंगे। दोपहर बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम और शाम को कवि गोष्ठी का आयोजन किया।
सुबह 11 बजे से शुरू हुई गोष्ठी में विभिन्न बैंकों के प्रतिनिधियों ने गीडा क्षेत्र में उद्योग लगाने वालों के लिए बैंक की तरफ से मिलने वाले ऋण प्रक्रिया के बारे में बताया गया। गीडा सीईओ ने कहा कि उद्यमियों की सुविधा के लिए सेवा पोर्टल शुरू किया गया है, जिसके जरिये प्लाट आवंटन का शुल्क बैंक में जमा कराने के लिए ऑनलाइन सुविधा दी गई है। भविष्य में इसमें और नए विकल्प जोड़े जाएंगे।
कहा, उद्यमी अगर अपनी फैक्टरी समय से चालू करते हैं तो बैंक उन्हें समय-समय पर ऋण उपलब्ध कराते रहेंगे। चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी गीडा डाॅ. आरडी पांडेय, संयुक्त आयुक्त उद्योग गोरखपुर एवं बस्ती मंडल एचपी सिंह, ओएसडी गीडा अनुपम मिश्र, उपायुक्त उद्योग गौरव मिश्रा समेत कई प्रमुख लोगों ने भी गोष्ठी को संबोधित किया।
दोपहर बाद हुए सांस्कृतिक कार्यक्रम
सांस्कृतिक कार्यक्रम में गीडा क्षेत्र के काॅलेज के छात्र व छात्राओं एवं स्थानीय कलाकारों ने प्रस्तुति दी। पवन पंछी द्वारा भोजपुरी गीत, विंध्याचल आजाद की टीम ने फरुवाही नृत्य, सोनी सेठ व राकेश श्रीवास्तव आदि ने भी कार्यक्रम प्रस्तुत किए।
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भगवान श्रीराम का जिक्र होता है हनुमान के साथ...
देर शाम आयोजित कवि गोष्ठी का शुभारंभ गीडा की सीईओ अनुज मलिक, डॉ. राकेश श्रीवास्तव आदि ने संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। सरस्वती वंदना नंदिनी श्रीवास्तव ने प्रस्तुत की। अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रमोद चोखानी ने किया। संचालन कर रहे मिन्नत गोरखपुरी की रचना सबकी श्रद्धा और सम्मान है इस नाम के साथ, भगवान श्रीराम का जिक्र होता है हनुमान के नाम के साथ... पर खूब तालियां बजीं। प्रमोद चोखानी की रचना फूल पर बैठा कोई भंवरा तो उसे उड़ाया कर... और प्रेमनाथ मिश्रा की रचना नए अवसर, नए सपने, नए अरमान हैं गीडा नए गोरक्षनगरी की पहचान है... पर खूब तालियां बजीं। इसके अलावा राजा त्रिपाठी, उत्कर्ष शुक्ला रुद्रा, डॉ. सरिता, नन्दिनी श्रीवास्तव आदि ने भी काव्य पाठ किया। इस अवसर पर प्रकाश, आरजे नवीन, शिवेंद्र पांडेय, दिनेश पाठक आदि उपस्थित रहे।
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